
देश में मौसम का मिजाज एक साथ दो तस्वीरें दिखा रहा है. एक तरफ पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बन रही है. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, विदर्भ और दक्षिण-पूर्व मध्य प्रदेश के हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक लू की स्थिति बनी रह सकती है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 40 से 70 किमी प्रति घंटे तक तेज हवा, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई है.
इस बीच, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 23 जून को महाराष्ट्र के और हिस्सों समेत मुंबई, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कई क्षेत्रों में आगे बढ़त दर्ज की है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मॉनसून आगे बढ़ सकता है. इसके बाद 3 से 4 दिनों में झारखंड, बिहार के बाकी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं.
24 जून को पश्चिमी तट सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाला है. कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है. पूर्वोत्तर राज्यों- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश की संभावना है.
पूर्वी भारत में ओडिशा, बिहार और झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. मध्य भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में बौछारों के साथ तेज हवा चलने के आसार हैं. हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के हिस्सों में गर्मी और उमस से राहत सीमित रहने की संभावना है.
दिल्ली-एनसीआर में 24 जून को आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहने का अनुमान है. दोपहर या शाम के समय गरज वाले बादल बनने की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. 25 जून तक मौसम लगभग ऐसा ही बना रह सकता है, जबकि 26 जून को हल्की बारिश, गरज-चमक और 20 से 40 किमी प्रति घंटे तक तेज हवा चलने के संकेत हैं. फिलहाल दिल्ली में मॉनसूनी बारिश का इंतजार जारी है.
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि भारी बारिश वाले इलाकों में किसान खेतों से जल निकासी की व्यवस्था रखें और धान, सब्जी और नर्सरी क्षेत्रों में पानी जमा न होने दें. तेज हवा की आशंका वाले क्षेत्रों में तैयार फसल और कटी उपज को तिरपाल से ढकें.
जहां लू की स्थिति बनी हुई है वहां हल्की सिंचाई करें, मल्चिंग अपनाएं और फलदार पौधों को अस्थायी छाया दें. पशुपालकों को पशुओं के लिए पर्याप्त साफ पानी और चारे की सुरक्षित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है.