
अल नीनो के कारण इस साल सामान्य से काफी कम बारिश की आशंका को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण और पेयजल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 'जलधारा-जलहारथी' कार्यक्रम को सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली पहल के रूप में लागू किया जाए, ताकि राज्य के किसी भी हिस्से में पेयजल संकट पैदा न हो.
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष सामान्य से करीब 39 फीसदी कम बारिश हो सकती है. ऐसे में जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता और खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए पहले से ठोस रणनीति तैयार करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की कमी नहीं आने दी जानी चाहिए.
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि जलधारा-जलहारती के तहत राज्यभर में 82,865 कार्य चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 79,826 कार्य पूरे किए जा चुके हैं. तालाबों और फीडर चैनलों के जीर्णोद्धार, फार्म पॉन्ड निर्माण और ट्रेंच खुदाई सहित 3,409.3 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी गई है.
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जून से दिसंबर के दौरान राज्य में सामान्य बारिश 867 मिमी रहती है, जबकि इस साल केवल 525 मिमी बारिश होने का अनुमान है. अगस्त में बारिश सामान्य से 56 फीसदी कम रह सकती है.
जलाशयों में पानी का भंडारण भी पिछले साल की तुलना में काफी घटा है. इस समय विभिन्न नदी बेसिनों में 563.05 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 825.6 टीएमसी था. साथ ही अगस्त से भूजल स्तर और गिरने की आशंका भी जताई गई है.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संभावित सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए पेयजल भंडारण की व्यापक योजना बनाई जाए. उन्होंने वेलुगोडु, गोराकल्लू, ओव्क, जीडीपल्ली और चेर्लोपल्ली जैसे जलाशयों में पेयजल के लिए पर्याप्त पानी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए.
साथ ही नागार्जुन सागर नहरों के जरिए जरूरत वाले जिलों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा. जिन इलाकों में पेयजल संकट की आशंका है, वहां पहले से टैंकर उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए.
एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद खेतों में खड़ी फसलों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जाए. भविष्य में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई. उन्होंने पशुओं के लिए चारे और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर 'गोकुलम' स्थापित करने और जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में भी उद्योगों को जरूरी जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. उन्होंने जिला कलेक्टरों को लगातार निगरानी रखने और लोगों के बीच पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए. साथ ही अतिरिक्त पानी वाले क्षेत्रों से जरूरत वाले इलाकों तक पानी पहुंचाने के लिए माइक्रो बेसिन कनेक्टिविटी की संभावनाओं का अध्ययन करने को भी कहा. (पीटीआई)