El Nino Alert: फरवरी 2027 तक अल नीनो का खतरा, जानें मॉनसून पर क्या होगा असर?

El Nino Alert: फरवरी 2027 तक अल नीनो का खतरा, जानें मॉनसून पर क्या होगा असर?

सरकार ने संसद में बताया है कि मई 2026 में बना 'अल नीनो' फरवरी 2027 तक रह सकता है. हालांकि अल नीनो से अक्सर बारिश कम होती है, लेकिन मानसून कई और चीज़ों पर भी निर्भर करता है, इसलिए इसका सटीक असर बताना अभी मुश्किल है. इसके चलते अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तापमान बढ़ने से 'समुद्री लू' चल सकती है, जिससे मछलियों और तटीय इलाकों को नुकसान हो सकता है. सरकार ने इससे निपटने के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है और 10 दिन पहले अलर्ट देने वाला सिस्टम भी तैयार है.

2027 तक रहेगा अल नीनो का असर2027 तक रहेगा अल नीनो का असर
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Aug 06, 2026,
  • Updated Aug 06, 2026, 9:26 AM IST

अल नीनो का प्रभाव फरवरी 2027 तक रह सकता है, यह जानकारी सरकार ने संसद में दी है. लेकिन मॉनसून पर इसके असर को लेकर बताया गया है किमॉनसून कई कारणों से प्रभावित होता है, इसलिए अल नीनो मानसून पर कितना प्रभावी रहेगा, यह पक्के तौर पर कहना अभी मुश्किल है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम की जानकारी देने वाली हमारी संस्था 'इनकोयस'  ने आधुनिक एआई तकनीक से यह अंदाज़ा लगाया है. इसके मुताबिक, मई 2026 में बना अल नीनो जून 2026 से फरवरी 2027 तक 70 से 90 फीसद मुमकिन है कि बना रहेगा. हालांकि, अल नीनो की वजह से अक्सर बारिश कम होती है, लेकिन हिंद महासागर के हालात  और हवाओं का मिज़ाज भी मानसून का फैसला करते हैं, जिन पर सरकार की पैनी नज़र बनी हुई है.

समंदर गर्म अल नीनो का अलर्ट

इस अल नीनो का सीधा असर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बहने वाली हवाओं पर पड़ सकता है. इन इलाकों में लगातार बढ़ते तापमान की वजह से 'समुद्री  हीटवेव चलने का अंदेशा काफी बढ़ गया है. समुंदर का  गर्म होने से पानी के अंदर मिलने वाले ज़रूरी पोषक तत्वों और वहां के इकोसिस्टम पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इससे मछलियों के ठिकाने बदल जाएंगे, जिससे मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर सीधा फर्क पड़ेगा. इसके अलावा, लहरों और ज्वार-भाटे में होने वाले अचानक बदलावों की वजह से जहाज़ों की आवाजाही और तटीय इलाकों के रोज़मर्रा के कामों में भी रुकावटें आ सकती हैं.

कैसे होगी इससे निपटने की तैयारी ?

इन समुद्री खतरों को देखते हुए सरकार पूरी तरह से मुस्तैद है.डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकारी महकमा तूफानों, ऊंची लहरों और तेज़ बहाव जैसी किसी भी आफत को लेकर काफी पहले से ही सटीक अलर्ट जारी करने में सक्षम हो गया है. समुंदर में तैरते हुए खास सेंसर्स, पानी के अंदर जाने वाले ग्लाइडर और आधुनिक सैटेलाइट्स के ज़रिए चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है. सिर्फ इतना ही नहीं, समंदर किनारे बसने वाले लोगों की हिफाज़त के लिए अभ्यास और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी मुश्किल वक़्त में आम आवाम को कोई नुकसान न पहुंचे और वे पहले से अलर्ट रहें.

बदलते मौसम की चेतावनी

तमिलनाडु और भारत के दूसरे तमाम तटीय राज्यों की सुरक्षा के लिए अब एक बेहद एडवांस सिस्टम काम कर रहा है. 'इनकोयस' अब लहरों, तेज़ हवाओं, ज्वार-भाटे और समुंदर की सतह के तापमान का हाल करीब दस दिन पहले ही बता देता है. यह ज़रूरी जानकारी सीधे राज्य सरकारों और लोकल प्रशासन को दी जाती है ताकि वो वक़्त रहते ज़रूरी इंतज़ाम कर सकें. केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर किनारे पर ऐसे खास स्टेशन और मशीनें लगाई हैं जो सुनामी जैसी बड़ी आफत का भी पहले से पता लगा लें. इससे मछुआरों को समुंदर में जाने से पहले ही हिदायत मिल जाती है कि उन्हें किन दिनों में अंदर जाने से बचना चाहिए।

जानिए सरकार ने क्या कहा

इन  इंतज़ामों के अलावा, सरकार ने भविष्य के लिए भी कमर कस ली है. 'डीप ओशन मिशन'  के तहत इस साल 145 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट रखा गया है, ताकि समुंदर के अंदर मौजूद खनिजों और संसाधनों का नक्शा तैयार किया जा सके. गहरे पानी में खोजबीन के लिए बिना इंसान वाले एडवांस रोबोटिक व्हीकल्स  को पानी में उतारा जा रहा है. इन तमाम कोशिशों का सीधा मकसद यह है कि हम बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन  के खतरों का डटकर मुकाबला कर सकें और अपने समुद्री किनारों, वहां बसने वाले लोगों और देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से सुरक्षित रख सकें.

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