एक साल पहले धराली में आया था सैलाब, आज भी नहीं संभल पाया गांव, नई जिंदगी की तलाश में लोग

एक साल पहले धराली में आया था सैलाब, आज भी नहीं संभल पाया गांव, नई जिंदगी की तलाश में लोग

धराली आपदा को एक साल पूरा हो गया है. 5 अगस्त 2025 को आई खीर गंगा बाढ़ ने पूरे इलाके का भूगोल बदल दिया था. 115 घर तबाह हुए, 52 लोग लापता हुए और कई परिवारों की जिंदगी उजड़ गई. राहत कार्यों के बावजूद धराली आज भी तबाही के निशान और अपनों की तलाश की कहानी कह रहा है.

धराली में बाढ़ का एक सालधराली में बाढ़ का एक साल
क‍िसान तक
  • Uttarkashi,
  • Aug 05, 2026,
  • Updated Aug 05, 2026, 7:55 AM IST

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्र में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को एक साल पूरा हो गया है. एक साल बीतने के बाद भी यहां के लोगों के जख्म नहीं भरे हैं. कभी सेब के बागानों, खूबसूरत होटलों और हरियाली के लिए मशहूर धराली का पूरा भूगोल बदल चुका है. जहां पहले पर्यटकों की चहल-पहल रहती थी, वहां आज भी मलबा और तबाही के निशान साफ दिखाई देते हैं. इस आपदा ने न केवल लोगों के घर उजाड़े, बल्कि कई परिवारों से उनके अपने भी हमेशा के लिए छीन लिए.

खीर गंगा की बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही

5 अगस्त 2025 को खीर गंगा में आई अचानक बाढ़ ने धराली और हर्षिल इलाके में भारी तबाही मचा दी थी. इस आपदा में करीब 115 मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए. कई होटल, दुकानें और सड़कें भी बाढ़ की चपेट में आ गईं. चार लोगों के शव बरामद हुए, जिनकी डीएनए जांच के बाद पहचान की गई. इनमें धराली का एक स्थानीय युवक और भारतीय सेना के तीन जवान शामिल थे.

आज भी 52 लोगों का कोई सुराग नहीं

इस आपदा में कुल 52 लोग लापता हो गए थे. एक साल बाद भी इनमें से किसी का पता नहीं चल पाया है. प्रशासन ने अब तक 20 लोगों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मृत घोषित किया है. इनमें से 19 परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है, जबकि एक परिवार को राहत राशि देने की प्रक्रिया जारी है. बाकी 32 लोगों को मृत घोषित करने के लिए उनके संबंधित राज्यों के साथ समन्वय किया जा रहा है. जब यह प्रक्रिया पूरी होगी, तब उनके परिवारों को भी सरकारी सहायता मिल सकेगी.

मृतकों और प्रभावित परिवारों को मिली आर्थिक मदद

आपदा में जिन चार लोगों के शव मिले थे, उनके परिजनों को राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से चार लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये मिलाकर कुल पांच लाख रुपये की सहायता दी गई. इसके अलावा पूरी तरह से नष्ट हुए 115 मकानों के मालिकों को भी पांच-पांच लाख रुपये की दर से कुल 5.75 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई. जिन घरों को आंशिक नुकसान हुआ था, उन्हें भी नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान की गई.

बेघर परिवारों को किराया और कारोबारियों को राहत

आपदा में जिन 115 परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए थे, उन्हें छह महीने तक हर महीने चार हजार रुपये किराया सहायता दी गई ताकि वे अस्थायी रूप से कहीं और रह सकें. इसके साथ ही होटल और दुकान चलाने वाले लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष से अब तक 6.83 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक मदद दी जा चुकी है. सरकार का उद्देश्य था कि प्रभावित परिवार दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

सेब के बागानों को दोबारा संभालने की कोशिश

धराली क्षेत्र अपनी सेब की खेती के लिए पूरे देश में जाना जाता है. आपदा के बाद बागवानों को बड़ा नुकसान हुआ था. उद्यान विभाग ने किसानों से 256.83 मीट्रिक टन सेब खरीदकर उन्हें 1.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी. इसके अलावा किसानों को फलदार पौधे, सब्जियों के बीज, प्लास्टिक क्रेट, सेब के बॉक्स, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री भी अनुदान पर उपलब्ध कराई गई ताकि वे फिर से खेती शुरू कर सकें.

सड़क, खेती और पशुपालन को भी मिला सहारा

आपदा के बाद लोक निर्माण विभाग ने करीब 88.25 लाख रुपये खर्च कर धराली पुल, हर्षिल मोटर मार्ग और अन्य वैकल्पिक रास्तों की मरम्मत कर आवागमन फिर से शुरू कराया. कृषि विभाग ने 274 किसानों को कृषि यंत्र, बीज और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई. साथ ही सूक्ष्म सिंचाई की सुविधाएं भी विकसित की गईं. पशुपालन विभाग ने 235 पशुओं के नुकसान पर 13 पशुपालकों को मुआवजा दिया और उन्हें आजीविका से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी दिलाया.

आज भी नहीं लौट सकी धराली की पुरानी पहचान

सरकार और प्रशासन ने राहत और पुनर्वास के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन धराली अब पहले जैसा नहीं रहा. जहां कभी हरे-भरे सेब के बाग, होटल और रौनक दिखाई देती थी, वहां आज भी मलबे के ढेर नजर आते हैं. कई परिवार अब भी अपने पुराने घरों और जीवन को याद कर भावुक हो जाते हैं. एक साल बाद भी इस इलाके में आपदा की यादें हर जगह दिखाई देती हैं.

8 परिवारों को अब तक नहीं मिली बीमा राशि

धराली आपदा में आठ ऐसे लोगों की मौत हुई थी, जिन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में पंजीकरण कराया था. लेकिन उनके परिवारों को अब तक बीमा की दो लाख रुपये की राशि नहीं मिल पाई है. इसकी वजह यह है कि योजना के नियमों के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी होती है. चूंकि इन लोगों के शव मलबे में दबे होने के कारण कभी मिले ही नहीं, इसलिए उनका पोस्टमार्टम नहीं हो सका.

डीएम ने दिलाया भरोसा, जल्द मिल सकती है बीमा राशि

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है. भारत सरकार के आदेश के आधार पर बाद में इन लोगों को मृत घोषित किया गया था. अब इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित बीमा अधिकारियों को भेजी जाएगी. उम्मीद है कि नियमों में आवश्यक छूट मिलने के बाद प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की बीमा राशि मिल सकेगी.

धराली की कहानी सिर्फ एक आपदा नहीं, एक लंबा संघर्ष है

धराली आपदा को एक साल बीत चुका है, लेकिन यहां के लोगों का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई लोग नई शुरुआत करने की कोशिश में जुटे हैं. राहत और पुनर्वास के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन धराली की पुरानी तस्वीर वापस आने में अभी लंबा समय लग सकता है. यह आपदा आज भी याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं केवल घर और सड़कें ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बदल देती हैं. (ओंकार बहुगुणा की रिपोर्ट)

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