
राजस्थान के किसानों ने जहां अगस्त में बारिश की मनोकामना की थी. वही बारिश अब किसानों के लिए आफत बनने वाली है. प्रदेश के कुछ हिस्सों में एक बार फिर से मॉनसून एक्टिव होने लगा है. इससे कोटा, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में अगले तीन-चार दिन तक हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है. मौसम केन्द्र, जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो-प्रेशर एरिया बना है. यह आज और तेज होकर स्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र बन गया है.
इसके अगले दो दिन में ओडिशा-छत्तीसगढ़ की तरफ आगे बढ़ने की पूरी संभावना है. मानसून ट्रफ लाइन कल की तरह आज भी बीकानेर से होकर गुजर रही है. बारिश होने से कटी हुई फसलें भीग जाएंगी. चारा और बीज पानी की वजह से खराब होगा.
जयपुर मौसम केन्द्र के डायरेक्टर राधेश्याम शर्मा के अनुसार इस सिस्टम से प्रदेश के कुछ भागों में अगले दिनों में मानसून सक्रिय होगा. इसमें पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग के कुछ भागों में अगले तीन-चार दिन हल्के से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि कोटा, उदयपुर संभाग में 15-18 सितंबर को कहीं-कहीं भारी बारिश भी होने की संभावना है.
शर्मा के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर व बीकानेर संभाग के कुछ भागों में भी इस सिस्टम के कारण बारिश हो सकती है. अगले 4-5 दिनों में इस क्षेत्र में बारिश हो सकती है. पश्चिमी क्षेत्र में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है.
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मौसम केन्द्र से मिली सूचना के अनुसार पिछले 24 घंटे में चित्तौड़गढ़ के भदेसर में तीन सेमी, बारां के अंता में दो, जवाजा दो, दानपुर एक सहित करीब 20 गांव-कस्बों में एक सेमी तक बारिश हुई. वहीं, पश्चिमी राजस्थान में पाली के मारवाड़ जंक्शन में पांच सेमी, रायपुर में तीन, नागौर के खींवसर में एक सेमी बारिश हुई.
इसके साथ ही पश्चिमी राजस्थान के और करीब 10-15 कस्बों, गांवों में एक सेंटीमीटर बरसात दर्ज हुई है. वहीं, प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान श्रीगंगानगर में 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. इसके बाद सीकर के फतेहपुर में 40.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ.
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भले ही मॉनसून एक बार फिर से एक्टिव हुआ है, लेकिन राजस्थान में अब ज्यादातर जगहों पर फसलें पकाव पर हैं. कई जगहों पर किसानों ने फसल काटना शुरू भी कर दिया है. लेकिन फिलहाल बारिश फसलों के लिए नुकसानदायक साबित होगी. क्योंकि पानी से उपज भीगेगी और इससे बीज खराब होगा. साथ ही होने वाला चारा भी खराब हो जाएगा. इससे किसानों को दो-तरफा नुकसान होगा.