
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के ताजा आकलन के अनुसार प्रदेश में मानसून की दस्तक अब 24 से 25 जून के बीच होने की संभावना है. पहले जहां मानसून के 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण इसके आगमन में देरी हो रही है.विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की धीमी रफ्तार और अल नीनो के प्रभाव ने इसकी प्रगति को प्रभावित किया है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में मानसून मध्य प्रदेश की सीमा से काफी दूरी पर ठहरा हुआ है. इसकी अग्रिम रेखा भोपाल से लगभग 550 किलोमीटर दूर बनी हुई है. मानसून की गति धीमी पड़ने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अभी भी गर्मी और उमस का असर बना हुआ है. आने वाले कुछ दिनों तक लोगों को तेज धूप, चिपचिपी गर्मी और असहज मौसम का सामना करना पड़ सकता है.
मौसम केंद्र के विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सक्रिय मौसम प्रणालियां फिलहाल कमजोर पड़ी हुई हैं.इसके कारण मानसूनी हवाओं को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पा रही है. साथ ही हवाओं के रुख में बदलाव और वातावरण में नमी की कमी भी मानसून की प्रगति में बाधा बन रही है.
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि अगले 72 घंटों के दौरान अरब सागर से आने वाली ठंडी और नम हवाएं सक्रिय हो सकती हैं.यदि ऐसा होता है तो प्रदेश के मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा और मानसून आगे बढ़ने लगेगा.
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून का प्रवेश पूर्वी हिस्से से होने की संभावना है.डिंडोरी, मंडला और अमरकंटक क्षेत्र मानसून के प्रवेश द्वार बन सकते हैं. इन इलाकों में मानसून पहुंचने के बाद अगले 72 से 96 घंटों के भीतर जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग के कई जिलों में व्यापक वर्षा गतिविधियां शुरू हो सकती हैं.
इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, उज्जैन और मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लोगों को अभी कुछ और दिन इंतजार करना पड़ सकता है. इन क्षेत्रों में जून के अंतिम सप्ताह में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई गई है.
1 जून से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. इस अवधि में जहां औसतन करीब डेढ़ इंच बारिश होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक वर्षा इससे काफी कम रही है.
सबसे अधिक चिंता पूर्वी मध्य प्रदेश को लेकर है, जहां सामान्य बारिश का आधा हिस्सा भी नहीं बरस पाया है. वर्षा की कमी का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई किसान खरीफ सीजन की बुआई के लिए मानसून का इंतजार कर रहे हैं.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की पश्चिमी शाखा की प्रगति 8 जून से लगभग रुकी हुई है. हालांकि ऐसी स्थिति पहले भी देखने को मिल चुकी है. वर्ष 2024 और 2025 में भी मानसून के शुरुआती चरण में ब्रेक लगा था, लेकिन बाद में इसकी सक्रियता बढ़ी और सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल मानसून की देरी चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इससे पूरे सीजन की बारिश पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. यदि आगामी सप्ताह में अनुकूल मौसमीय परिस्थितियां बनती हैं तो प्रदेश में अच्छी वर्षा होने की संभावना बनी हुई है.