
केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो (El Nino) की स्थिति विकसित हो चुकी है और इसके आगे और मजबूत होने की संभावना है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ओर से "सुपर अल नीनो" नाम की कोई आधिकारिक श्रेणी निर्धारित नहीं की गई है.
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अल नीनो की घटनाओं को आमतौर पर भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले बदलाव के आधार पर कमजोर (Weak), मध्यम (Moderate), मजबूत (Strong) और बहुत मजबूत (Very Strong) श्रेणियों में बांटा जाता है.
सरकार के अनुसार, भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही 2026 के मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो परिस्थितियों के विकसित होने का अनुमान जताया था. जून 2026 में अल नीनो कमजोर स्तर पर था, लेकिन जुलाई में यह मध्यम स्तर तक पहुंच गया. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान इसकी तीव्रता और बढ़ सकती है और यह "बहुत मजबूत" श्रेणी तक पहुंच सकता है.
हालांकि सरकार का कहना है कि भारतीय मॉनसून पर एल नीनो का कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन केवल इसी एक कारक के आधार पर नहीं किया जा सकता. मॉनसून की स्थिति समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली कई जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है. अल नीनो इनमें से एक महत्वपूर्ण फैक्टर जरूर है, लेकिन अंतिम प्रभाव अन्य जलवायु तंत्रों के साथ इसके परस्पर संबंधों पर निर्भर करेगा.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग लगातार अल नीनो और अन्य जलवायु कारकों की निगरानी कर रहा है. विभाग समय-समय पर मौसमी और मासिक पूर्वानुमान जारी करने के साथ-साथ विस्तारित अवधि (Extended Range) के मौसम पूर्वानुमान भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि केंद्र और राज्य सरकारें समय रहते जरूरी तैयारियां कर सकें.
सरकार ने यह भी बताया कि आईएमडी प्रतिदिन अगले सात दिनों के लिए प्रभाव आधारित पूर्वानुमान (Impact-Based Forecasts) और जोखिम आधारित चेतावनियां जारी करता है. इन्हें अलग-अलग संचार माध्यमों के जरिए आपदा प्रबंधन एजेंसियों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाया जाता है. इन चेतावनियों का उद्देश्य संभावित मौसमीय जोखिमों से निपटने के लिए समय रहते तैयारी और प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करना है.
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में मॉनसूनी बारिश को प्रभावित कर सकती है, इसलिए कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा तैयारी से जुड़ी एजेंसियां मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. फिलहाल सरकार और आईएमडी ने कहा है कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और समय-समय पर आवश्यक सलाह जारी की जाएगी.