अमरोहा की हितेश लिख रहीं सफलता की नई कहानी! इटली-ओमान और नीदरलैंड से मिले शहद-कुकीज के बड़े ऑर्डर

अमरोहा की हितेश लिख रहीं सफलता की नई कहानी! इटली-ओमान और नीदरलैंड से मिले शहद-कुकीज के बड़े ऑर्डर

Amroha Farmer Story: हितेश चौधरी ने बताया कि इन उत्पादों के पीछे 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत जुड़ी है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में बदलाव लाते हुए उन्होंने कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे लाकर 120 हेक्टेयर में 'एडवांस ताइवान पिंक अमरूद' की खेती कराई.

amroha fpo hitesh chaudhary अमरोहा की महिला किसान हितेश चौधरीamroha fpo hitesh chaudhary अमरोहा की महिला किसान हितेश चौधरी
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 7:30 AM IST

अमरोहा के ग्रामीण हुनर और जैविक उत्पादों का अब विदेशों में डंका बज रहा है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल पर प्रदर्शित प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (ब्रांड नाम: किसान वेदा) के उत्पादों को विदेशी और घरेलू खरीदारों ने हाथों-हाथ लिया। कभी गांव की चौखट से शुरू हुआ यह सफर अब ट्रेड शो के मंच पर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गया है। इटली, ओमान और नीदरलैंड की कंपनियों ने बड़े निर्यात सौदों के लिए एमओयू किए हैं। 

नीदरलैंड-जापान से टन में शहद की मांग

इसी क्रम में हितेश चौधरी के एफपीओ प्रखंड बायो एनर्जी एफपीओ द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक शहद और मिलेट्स कुकीज की सबसे अधिक मांग रही. ओमान, जापान और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडलों ने शहद के आयात के लिए आधिकारिक एमओयू किया है. नीदरलैंड के खरीदारों ने टन के हिसाब से बल्क सप्लाई की मांग रखी है, जबकि शुरुआत में 1,000 से 1,500 बोतलों के पहले बैच पर सहमति बनी है. वहीं, इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी से बनी कुकीज के लिए अनुबंध किया है, जिसके लिए ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो के भाव पर समझौता हुआ है. एफपीओ के सभी उत्पाद एपीडा और पीजीएस द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणित हैं.

कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवले की बिक्री

बागपत के प्रमुख एफपीओ और 'डॉक्टर मोरिंगा' सहित करीब 10 से 15 घरेलू कंपनियों और एफपीओ ने उत्पादों की आपूर्ति के लिए बातचीत पूरी कर ली है. सब्जी के रूप में खाई जाने वाली कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवले और लहसुन के पारंपरिक अचार को खरीदारों ने खूब पसंद किया. वहीं, दूध से 10 गुना अधिक कैल्शियम वाले मोरिंगा पाउडर, नीम शहद, मिलेट्स नमकीन, मल्टीग्रेन आटा तथा लेमनग्रास से तैयार टी, ऑयल, हैंड सैनिटाइजर और फिनाइल की भी जमकर बिक्री हो रही है. पूरी तरह हैंडमेड और केमिकल-मुक्त होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहरी उपभोक्ताओं ने इन उत्पादों को प्राथमिकता दी.

ताइवान पिंक अमरूद और मल्टी क्रॉपिंग का मॉडल

हितेश चौधरी ने बताया कि इन उत्पादों के पीछे 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत जुड़ी है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में बदलाव लाते हुए उन्होंने कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे लाकर 120 हेक्टेयर में 'एडवांस ताइवान पिंक अमरूद' की खेती कराई.

उन्होंने बताया कि किसानों की आमदनी सुनिश्चित करने के लिए गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और मिलेट्स (रागी, ज्वार) की मल्टी क्रॉपिंग कराई जाती है. बाजार में बिचौलियों से बचाने के लिए एफपीओ खुद खरीदार बनता है. जैसे रागी का बाजार भाव यदि ₹60 प्रति किलो है, तो एफपीओ किसानों से ₹63 प्रति किलो की दर से खरीद करता है.

सालाना ₹50 लाख का कारोबार

एफपीओ शुरू करने से पहले हितेश एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका थीं और बच्चों को योग सिखाती थीं. वर्ष 2020 में उन्होंने एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी तथा गाय के गोबर के दीपक बनाने शुरू किए. 17 अप्रैल 2021 को उन्होंने निजी एफपीओ की स्थापना की. आज उनके एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर ₹50 लाख पहुंच चुका है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत आय ₹10 से 11 लाख है। इस वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ का टर्नओवर पार करने का लक्ष्य रखा गया है.

अब मोरिंगा बर्फी और हल्दी अचार की तैयारी

हितेश ने आगे बताया कि कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत बने क्लस्टरों के माध्यम से हितेश किसानों और सखियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देती रही हैं. ट्रेड शो में मिली वैश्विक पहचान के बाद अब वह मोरिंगा के लड्डू, मोरिंगा की बर्फी और कस्तूरी, काली व सुगंधा हल्दी के साथ हल्दी का विशेष अचार लॉन्च करने जा रही हैं. राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा सराही जा चुकीं हितेश चौधरी का यह सफर आगे भी जारी रहेगा.

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