धान छोड़ करेले की खेती से चमकी किस्मत, किसान दीपक की सात गुना बढ़ी आय

धान छोड़ करेले की खेती से चमकी किस्मत, किसान दीपक की सात गुना बढ़ी आय

महासमुंद जिले के प्रगतिशील किसान दीपक ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर करेला उत्पादन अपनाया। फसल विविधीकरण से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं।

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Jun 10, 2026,
  • Updated Jun 10, 2026, 9:18 AM IST

कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बीच अब किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.इसका सकारात्मक परिणाम किसानों की आय में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है. महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम बंसुलीडीह निवासी प्रगतिशील किसान दीपक इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं. राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत मिली तकनीकी सहायता और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उन्होंने अपनी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है.

कभी केवल धान की खेती करने वाले दीपक आज करेला उत्पादन के माध्यम से न केवल बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकता है.

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई दिशा

वर्ष 2025-26 में दीपक ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सब्जी क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम से जुड़कर करेला उत्पादन की शुरुआत की.उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी एक हेक्टेयर सिंचित भूमि पर व्यावसायिक स्तर पर करेला की खेती की.

खेती शुरू करने से पहले उन्हें फसल चयन, पौध प्रबंधन, सिंचाई तकनीक और बाजार की मांग से संबंधित जानकारी प्रदान की गई.इसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक तकनीकों पर आधारित खेती को अपनाया.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ा उत्पादन

दीपक ने करेला उत्पादन में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया. ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत हुई और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रही. वहीं मल्चिंग तकनीक के कारण खेत में नमी लंबे समय तक बनी रही और खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिली.

इन तकनीकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ, उत्पादन लागत नियंत्रित रही और उपज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.आधुनिक कृषि पद्धतियों के कारण फसल पर मौसम के प्रतिकूल प्रभाव भी कम पड़े.

धान की तुलना में सात गुना बढ़ी आय

दीपक बताते हैं कि पहले वे अपनी भूमि पर धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सालाना लगभग 42 हजार रुपये का लाभ मिलता था.हालांकि बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे को देखते हुए उन्होंने वैकल्पिक फसल के रूप में करेला उत्पादन का निर्णय लिया.

करेला की खेती से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 18 टन उत्पादन प्राप्त हुआ.बाजार में करेला का औसत मूल्य करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने से उनकी आय में भारी वृद्धि हुई. सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 2.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो धान की खेती से होने वाली आय की तुलना में करीब सात गुना अधिक है.

आर्थिक रूप से मजबूत हुआ परिवार

दीपक का कहना है कि उद्यानिकी खेती अपनाने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. बढ़ी हुई आय से परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा रहा है.साथ ही खेती में नई तकनीकों को अपनाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

वे अब अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ बाजार आधारित सब्जी उत्पादन अपनाने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का लाभ लें तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.

किसानों के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी

किसान दीपक की सफलता इस बात का प्रमाण है कि फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर खेती से बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है. राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाएं किसानों को नई संभावनाओं से जोड़ रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

दीपक की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक समृद्धि लेकर आई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

 

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