
महाराष्ट्र में लगातार दबाव झेल रहे प्याज उत्पादक किसानों को राहत देने और इस क्षेत्र की दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने विशेषज्ञों की एक उप समिति (Sub Committee) गठित की है, जो प्याज के दामों में आई गिरावट के कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी और सुधार के लिए तत्काल और दीर्घकालिक सुझाव देगी. यह उपसमिति उस सचिव स्तर की समिति के तहत काम करेगी, जिसे सहकारिता, विपणन और वस्त्र विभाग ने अप्रैल में प्याज उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देने के लिए बनाया था.
नई समिति का मुख्य फोकस यह समझना होगा कि बाजार में बार-बार आने वाली कीमतों की गिरावट किन वजहों से पैदा हो रही है और इससे किसानों को कैसे बचाया जा सकता है. सरकार ने उपसमिति को 15 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है. इसके तहत समिति पुणे के राजगुरुनगर स्थित राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन द्वारा विकसित प्याज भंडारण सुविधाओं का भी अध्ययन करेगी.
सरकार ने समिति को पिछले 7 से 8 वर्षों के दौरान केंद्र की प्याज निर्यात नीति के प्रभाव का अध्ययन करने की जिम्मेदारी भी दी है. समिति यह देखेगी कि निर्यात से जुड़े फैसलों ने घरेलू बाजार और किसानों को मिलने वाले दामों पर कितना असर डाला. इसके आधार पर आगे की नीति को मजबूत करने के लिए सुझाव तैयार किए जाएंगे.
उपसमिति केवल कीमतों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी. इसे कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित बेहतर गुणवत्ता वाली प्याज किस्मों को बाजार व्यवस्था से जोड़ने, उच्च तापमान में प्याज भंडारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने और उससे जुड़ी लागत का आकलन करने का भी काम दिया गया है. साथ ही प्याज से जुड़े वैल्यू एडिशन और उप-उत्पादों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा.
समिति में कृषि, विपणन और उद्योग क्षेत्र से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. इसमें पूर्व कुलपति डॉ. किसानराव लावंडे, पूर्व विपणन निदेशक सुनील पवार, इंडो वेजिटेबल्स डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सारंग निर्मल, उद्यमी नरेंद्र पवार और महाराष्ट्र के विपणन निदेशक शरद जरे शामिल हैं. शरद जरे समिति के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे.
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और यहां कीमतों में उतार-चढ़ाव लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. खासकर नासिक क्षेत्र के किसानों पर इसका असर अधिक देखा जाता रहा है. ऐसे में सरकार की यह पहल बाजार स्थिरता और किसानों की आय सुधारने की दिशा में अहम मानी जा रही है. (पीटीआई)