महाराष्‍ट्र में प्याज के दाम संकट का तोड़ निकालेंगे एक्‍सपर्ट, सरकार को 15 दिन में मिलेगी रिपोर्ट

महाराष्‍ट्र में प्याज के दाम संकट का तोड़ निकालेंगे एक्‍सपर्ट, सरकार को 15 दिन में मिलेगी रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की गिरती कीमतों से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए विशेषज्ञ उपसमिति बनाई है. समिति कीमत गिरने के कारणों, निर्यात नीति के असर और प्याज वैल्यू चेन की समीक्षा करेगी. रिपोर्ट 15 दिन में सरकार को सौंपी जाएगी.

Expert Sub Committee for OnionExpert Sub Committee for Onion
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 10, 2026,
  • Updated Jun 10, 2026, 4:47 PM IST

महाराष्ट्र में लगातार दबाव झेल रहे प्याज उत्पादक किसानों को राहत देने और इस क्षेत्र की दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने विशेषज्ञों की एक उप समिति (Sub Committee) गठित की है, जो प्याज के दामों में आई गिरावट के कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी और सुधार के लिए तत्काल और दीर्घकालिक सुझाव देगी. यह उपसमिति उस सचिव स्तर की समिति के तहत काम करेगी, जिसे सहकारिता, विपणन और वस्त्र विभाग ने अप्रैल में प्याज उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देने के लिए बनाया था.

नई समिति का मुख्य फोकस यह समझना होगा कि बाजार में बार-बार आने वाली कीमतों की गिरावट किन वजहों से पैदा हो रही है और इससे किसानों को कैसे बचाया जा सकता है. सरकार ने उपसमिति को 15 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है. इसके तहत समिति पुणे के राजगुरुनगर स्थित राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन द्वारा विकसित प्याज भंडारण सुविधाओं का भी अध्ययन करेगी.

निर्यात नीति के असर की भी होगी समीक्षा

सरकार ने समिति को पिछले 7 से 8 वर्षों के दौरान केंद्र की प्याज निर्यात नीति के प्रभाव का अध्ययन करने की जिम्मेदारी भी दी है. समिति यह देखेगी कि निर्यात से जुड़े फैसलों ने घरेलू बाजार और किसानों को मिलने वाले दामों पर कितना असर डाला. इसके आधार पर आगे की नीति को मजबूत करने के लिए सुझाव तैयार किए जाएंगे.

खेती से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन पर रहेगा फोकस

उपसमिति केवल कीमतों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी. इसे कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित बेहतर गुणवत्ता वाली प्याज किस्मों को बाजार व्यवस्था से जोड़ने, उच्च तापमान में प्याज भंडारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने और उससे जुड़ी लागत का आकलन करने का भी काम दिया गया है. साथ ही प्याज से जुड़े वैल्यू एडिशन और उप-उत्पादों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा.

विशेषज्ञों को सौंपी गई जिम्मेदारी

समिति में कृषि, विपणन और उद्योग क्षेत्र से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. इसमें पूर्व कुलपति डॉ. किसानराव लावंडे, पूर्व विपणन निदेशक सुनील पवार, इंडो वेजिटेबल्स डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सारंग निर्मल, उद्यमी नरेंद्र पवार और महाराष्ट्र के विपणन निदेशक शरद जरे शामिल हैं. शरद जरे समिति के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे.

किसानों की लंबे समय से रही है मांग

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और यहां कीमतों में उतार-चढ़ाव लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. खासकर नासिक क्षेत्र के किसानों पर इसका असर अधिक देखा जाता रहा है. ऐसे में सरकार की यह पहल बाजार स्थिरता और किसानों की आय सुधारने की दिशा में अहम मानी जा रही है. (पीटीआई)

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