
परिवार का कमाने वाला सदस्य अचानक दुनिया छोड़ दे तो उसके पीछे रह गए लोगों के सामने दुख के साथ रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो जाता है. खासकर छोटे किसान और खेती पर निर्भर परिवारों के लिए ऐसी स्थिति और मुश्किल हो सकती है. उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना ऐसे ही किसान परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बन रही है.
योजना के तहत पात्र किसान की दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है. अधिकतम सहायता राशि 5 लाख रुपये तक है. इसका लाभ केवल मुख्य भूमिधारी किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्रता की शर्तों के तहत बटाईदार, पट्टेदार और भूमिहीन कृषि श्रमिक भी इसके दायरे में आते हैं.
लेकिन सरकारी योजना घोषित होने और उसका पैसा जरूरतमंद परिवार तक पहुंचने के बीच की प्रक्रिया कैसी होती है? परिवार को कितनी दौड़भाग करनी पड़ती है? आवेदन करने के कितने समय बाद पैसा मिलता है? इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए इटावा के जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के दो किसान परिवारों की कहानी सामने आई है.
जसवंतनगर क्षेत्र के ग्राम नगला बंशी, मौजा अध्यपुरा निवासी प्रेम सिंह की उम्र करीब 53 वर्ष थी. परिवार के मुताबिक करीब आठ महीने पहले वह अपने गांव में भैंसों के लिए चारा लेने जा रहे थे. इसी दौरान गांव के पास बहने वाली भोगनीपुर नहर के नजदीक एक मोटरसाइकिल ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी.
टक्कर इतनी तेज थी कि प्रेम सिंह सड़क किनारे खाई में जा गिरे. आसपास से गुजर रहे ग्रामीणों ने घटना की जानकारी उनके परिवार को दी. इसके बाद उनके बड़े भाई हरिश्चंद्र जाटव उन्हें इटावा के जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. अस्पताल में इलाज शुरू किया गया, लेकिन प्रेम सिंह की जान नहीं बच सकी.
उनकी मौत के बाद परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया.
प्रेम सिंह की तीन बेटियां और दो बेटे हैं. एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दो बेटियों की उम्र करीब 19 और 21 वर्ष है. दोनों बेटे अभी नाबालिग हैं और पढ़ाई कर रहे हैं.
परिवार के मुताबिक प्रेम सिंह के हिस्से में महज पांच बीघा कृषि भूमि थी. उनकी अचानक मृत्यु के बाद पत्नी फूल देवी और बच्चों के सामने परिवार चलाने के साथ बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई की चिंता खड़ी हो गई.
इसी दौरान ग्रामीणों से परिवार को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के बारे में जानकारी मिली. उन्हें बताया गया कि पात्रता पूरी होने पर किसान की दुर्घटना में मौत के बाद परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिल सकती है.
प्रेम सिंह के बड़े भाई हरिश्चंद्र जाटव के मुताबिक इसके बाद स्थानीय लेखपाल ने परिवार का सहयोग किया. प्रेम सिंह की पत्नी फूल देवी से जरूरी दस्तावेज लिए गए. इनमें आधार कार्ड, फोटो और खतौनी समेत अन्य जरूरी कागजात शामिल थे.
दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया गया. इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने परिवार और उसकी आर्थिक स्थिति से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की.
परिवार का दावा है कि आवेदन के दौरान उन्हें किसी तरह की बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और न ही बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े.
आवेदन और आवश्यक जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब चार महीने में फूल देवी के बैंक खाते में 5 लाख रुपये की सहायता एक किस्त में आ गई.
हरिश्चंद्र जाटव का कहना है कि परिवार को सहायता पाने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ी. स्थानीय स्तर पर लेखपाल की मदद से पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ी और आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में पहुंच गई.
परिवार के लिए यह रकम बड़ी राहत बनकर आई है. परिजन बताते हैं कि सहायता राशि से परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के साथ दोनों बेटियों की शादी में भी मदद मिलेगी.
हालांकि परिवार की एक और परेशानी अभी बाकी है. उनका पुराना कमरा टूट चुका है. ऐसे में परिवार ने सरकार से फूल देवी को आवास योजना का लाभ देने की भी मांग की है.
जसवंतनगर क्षेत्र के ही ग्राम नागरी निवासी किसान रामनारायण शर्मा के परिवार को भी योजना के तहत 5 लाख रुपये की सहायता मिली है.
परिवार के मुताबिक करीब 68 वर्षीय रामनारायण शर्मा 20 सितंबर 2025 को दवा लेने फिरोजाबाद गए थे. वापस लौटने के दौरान गांव के पास सड़क पार करते समय एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी. हादसा गांव के पास एक पेट्रोल पंप के नजदीक हुआ.
गंभीर रूप से घायल रामनारायण शर्मा की मौत हो गई. बाद में शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया.
परिवार के मुताबिक रामनारायण शर्मा के हिस्से में करीब 15 बीघा कृषि भूमि थी और उनके तीन बेटे हैं. बड़े बेटे हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्हें मोबाइल के माध्यम से किसान की दुर्घटना में मौत होने की स्थिति में मिलने वाली सरकारी सहायता के बारे में जानकारी मिली.
इसके बाद परिवार ने आधार कार्ड, खतौनी और बैंक पासबुक समेत जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन की प्रक्रिया शुरू की. तत्कालीन लेखपाल नेहा यादव ने आवेदन कराने में सहयोग किया.
तीनों भाइयों की ओर से आवश्यक शपथपत्र भी दिया गया. परिवार का कहना है कि आवेदन के बाद उन्हें किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा.
रामनारायण शर्मा के परिवार के अनुसार आवेदन और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के करीब छह महीने के अंदर 5 लाख रुपये की सहायता राशि बैंक खाते में आ गई.
परिवार का कहना है कि किसान की दुर्घटना में मृत्यु के बाद मिली यह आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ा सहारा साबित हुई.
इटावा एलआरसी विभाग के इंचार्ज नरेंद्र कुमार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद की सभी तहसीलों को मिलाकर किसान मृत्यु से जुड़े 508 मामलों में परिवारों को कुल 21 करोड़ 10 लाख 55 हजार रुपये की सहायता दी गई.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में मृतक किसानों के परिवारों तक योजना की आर्थिक मदद पहुंची है.
हालांकि किसी किसान परिवार को वास्तविक रूप से कितनी सहायता मिलेगी, यह घटना की प्रकृति, योजना की पात्रता और संबंधित विभाग की जांच व स्वीकृति पर निर्भर करता है. इसलिए दुर्घटना की स्थिति में परिवार को जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने और स्थानीय राजस्व विभाग से योजना की प्रक्रिया की जानकारी लेने की जरूरत होती है.
इटावा के इन दोनों परिवारों के अनुभव में एक बात समान रही. दुर्घटना के बाद योजना की जानकारी मिलने, दस्तावेज जमा करने और राजस्व विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके बैंक खातों में 5-5 लाख रुपये की सहायता आई. एक परिवार को करीब चार महीने तो दूसरे को लगभग छह महीने का समय लगा. दोनों परिवारों के मुताबिक उन्हें सहायता के लिए अनावश्यक दौड़भाग या रिश्वत जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा.