सोयाबीन पर सूखे की मार! दाने नहीं भरने से किसानों की बढ़ी परेशानी, आर्थिक मदद की मांग

सोयाबीन पर सूखे की मार! दाने नहीं भरने से किसानों की बढ़ी परेशानी, आर्थिक मदद की मांग

महाराष्ट्र के जालना में बारिश की कमी का असर सोयाबीन की फसल पर दिखाई दे रहा है. कई खेतों में सोयाबीन की फसल सूखने लगी है और दाने ठीक से नहीं भर पा रहे हैं. इससे उत्पादन घटने और खेती की लागत भी नहीं निकलने की चिंता किसानों को सता रही है.

बारिश की कमी से सूखी सोयाबीनबारिश की कमी से सूखी सोयाबीन
गौरव विजय साळी
  • Jalna,
  • Sep 28, 2026,
  • Updated Sep 28, 2026, 11:43 AM IST

महाराष्ट्र के जालना जिले में बारिश की कमी का असर सोयाबीन की फसल पर साफ दिखाई दे रहा है. लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में सोयाबीन की फसल सूख कर बर्बाद हो गई है. फसल में फलियां तो लगी हैं, लेकिन उनमें सही मात्रा में दाने नहीं भर पाए हैं. ऐसे में इस साल सोयाबीन के उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है. जालना तहसील के अंतरवाला गांव में भी किसानों के खेतों में सोयाबीन की फसल की यही स्थिति देखने को मिल रही है. किसानों का कहना है कि फसल पर हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद अब उत्पादन होने की उम्मीद बेहद कम है. ऐसे में उत्पादन लागत भी नहीं निकलने की चिंता किसानों को सता रही है. किसानों ने सरकार से नुकसान का पंचनामा कराकर आर्थिक मदद देने की मांग की है.

किसान को लागत निकालने की चिंता

जालना तहसील के अंतरवाला गांव के किसान रामेश्वर पडूल ने अपनी दो एकड़ जमीन में सोयाबीन की बुवाई की थी. सोयाबीन की खेती पर उन्हें करीब 50 हजार रुपये खर्च आया. इस दो एकड़ जमीन से उन्हें 18 से 20 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन की उम्मीद थी. इस उत्पादन से करीब एक लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी. लेकिन पिछले करीब डेढ़ महीने से बारिश नहीं होने के कारण खेत में खड़ी सोयाबीन की फसल सूख गई है. फसल में सही मात्रा में दाने नहीं भर पाए हैं. ऐसे में उत्पादन में बड़ी गिरावट होने की संभावना है. रामेश्वर पडूल का कहना है कि अब खेती पर किया गया खर्च भी वापस निकलना मुश्किल है. उन्होंने सरकार से प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये आर्थिक मदद देने की मांग की है.

किसान को उत्पादन घटने की आशंका

इसी गांवउत्पादन घटने की आशंका के दूसरे किसान प्रल्हाद इंगले ने तीन एकड़ जमीन में सोयाबीन की फसल लगाई थी. खेती पर उन्हें प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपये खर्च आया, यानी तीन एकड़ के लिए करीब 75 हजार रुपये खर्च हुए. प्रल्हाद इंगले को तीन एकड़ में करीब 15 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन और करीब 75 हजार रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण खेत में सोयाबीन की फसल सूख गई है. फसल खराब होने से अब अच्छा उत्पादन मिलने की संभावना नहीं है. ऐसे में खेती पर किया गया खर्च भी डूबने की आशंका है. प्रल्हाद इंगले ने सरकार से प्रति एकड़ 50 हजार रुपये आर्थिक मदद देने की मांग की है.

बर्बाद होने की कगार पर सोयाबीन की फसल

किसान भगवान गायकवाड ने भी अपने दो एकड़ खेत में सोयाबीन की बुवाई की थी. इसके लिए उन्हें करीब 50 हजार रुपये खर्च करने पड़े. दो एकड़ से उन्हें करीब 20 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन और एक लाख रुपये की आमदनी होने की संभावना थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन की फसल पर भी इसका सीधा असर पड़ा है. भगवान गायकवाड के मुताबिक, सोयाबीन की फलियों में पर्याप्त दाने नहीं भर पाए हैं और कई जगहों पर खेत में सिर्फ पत्तियां ही दिखाई दे रही हैं. ऐसे में खेती पर किया गया पूरा खर्च बेकार जाने की स्थिति बन गई है. भगवान गायकवाड ने सरकार से कम से कम प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की है.

किसानों ने सरकार से मांगी आर्थिक मदद 

जालना जिले में बारिश की कमी के कारण सोयाबीन उत्पादक किसानों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है. एक तरफ खेतों में खड़ी फसल सूख रही है, तो दूसरी तरफ फसल में दाने नहीं भरने के कारण उत्पादन घटने की आशंका है. किसानों का कहना है कि सोयाबीन की खेती पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी अब उत्पादन से लागत निकलना मुश्किल हो गया है. ऐसे में किसानों ने सरकार से नुकसानग्रस्त फसलों का पंचनामा कराकर तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग की है.

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