बिहार में सहकारिता का विस्तार, युवाओं के रोजगार पर जोर; हर जिले में बनेगा मॉडल सहकार ग्राम

बिहार में सहकारिता का विस्तार, युवाओं के रोजगार पर जोर; हर जिले में बनेगा मॉडल सहकार ग्राम

बिहार में सहकारिता नीति 2026 को जमीन पर लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. सरकार का फोकस सहकारी समितियों को आधुनिक बनाने, युवाओं को रोजगार और बिजनेस से जोड़ने और मखाना-शहद जैसे स्थानीय उत्पादों का कारोबार बढ़ाने पर है.

सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादवसहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Sep 25, 2026,
  • Updated Sep 25, 2026, 1:51 PM IST

बिहार में सहकारिता नीति 2026 को अब कागज से आगे जमीन पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है. सहकारिता विभाग ने नीति के तहत तय किए गए कामों को समय-सीमा में पूरा करने और उनकी लगातार निगरानी पर जोर दिया है. विभागीय समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए. नीति के तहत सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक और व्यवसाय से जोड़ने के साथ युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना है. युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर सहकारी समितियों से जोड़ने, रोजगार और बिजनेस के नए अवसर तैयार करने पर खास जोर दिया जा रहा है.

हर जिले में बनेगा मॉडल सहकार ग्राम

सहकारिता विभाग की योजना के तहत राज्य के हर जिले में एक मॉडल सहकार ग्राम विकसित किया जाएगा. इसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों को एक जगह मजबूत करना और सफल प्रयोगों को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाना है. इसके अलावा बेहतर काम कर रही सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करने की भी तैयारी है. विभाग का मानना है कि ऐसी समितियों के कामकाज को दूसरे क्षेत्रों में अपनाने से सहकारिता का दायरा बढ़ाया जा सकता है.

8 कार्य समूह संभालेंगे अलग-अलग जिम्मेदारियां

नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभाग ने आठ कार्य समूह बनाए हैं. इन्हें विधिक और डिजिटल सुधार, बीमा, उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग, हरित विकास, प्रशिक्षण, अनुसंधान, महिला और युवा नेतृत्व और सुशासन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है. नई सहकारी समितियों के गठन और नए सेवा क्षेत्रों तक सहकारिता को पहुंचाने पर भी काम होना है. ऑनलाइन पोर्टल के जरिए समितियों के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना है.

मखाना और शहद से बढ़ेगा कारोबार

सहकारिता नीति के तहत पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में भी काम शुरू हो चुका है. मखाना उत्पादक किसानों को संगठित करने के लिए 60 मखाना उत्पादक सहयोग समितियां गठित की गई हैं. वहीं, शहद उत्पादन के लिए 144 प्रखंड स्तरीय शहद उत्पादक सहयोग समितियां बनाई गई हैं. सहकारी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए आठ प्रमंडल स्तरीय मार्केटिंग यूनियन भी गठित किए गए हैं. राज्य स्तर पर मार्केटिंग फेडरेशन के गठन की प्रक्रिया चल रही है. इन यूनियनों के जरिए खाद के थोक कारोबार और ऑफ सीजन स्टोरेज जैसी व्यवस्थाओं को भी विकसित किया जाएगा.

स्कूलों में भी पढ़ाई जाएगी सहकारिता

सहकारिता आंदोलन को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में सहकारिता को विषय के रूप में शामिल करने की पहल की गई है. इसके लिए शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया है. वहीं, पूसा स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, आनंद से संबद्ध कराने की दिशा में भी कार्रवाई चल रही है. विभाग का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें प्रशिक्षण, कौशल और व्यवसाय के जरिए युवाओं को सहकारिता क्षेत्र से जोड़ा जा सके.

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