Vocal for Local: जंगली खजूर के गुड़ से महि‍लाओं को मिला रोजगार का जरिया, अब व्‍यापार बढ़ाने की तैयारी

Vocal for Local: जंगली खजूर के गुड़ से महि‍लाओं को मिला रोजगार का जरिया, अब व्‍यापार बढ़ाने की तैयारी

सुकमा की महिलाओं ने ‘छिंद’ के रस से शुद्ध गुड़ बनाकर स्थानीय संसाधनों से रोजगार का नया रास्ता खोला है. प्रशासन अब इस उत्पाद को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है.

Wild Chhind Sap JaggeryWild Chhind Sap Jaggery
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 04, 2026,
  • Updated Mar 04, 2026, 5:45 PM IST

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह (SHG) स्थानीय संसाधनों के सहारे आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है. छिंदगढ़ ब्लॉक के लिथिरास गांव में महिलाओं ने जंगली खजूर के पेड़ों यानी ‘छिंद’ के रस से प्राकृतिक गुड़ बनाकर स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्‍ता खोला है. यह पहल “वोकल फॉर लोकल” अभियान के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.

मह‍िलाओं को दी गई खास ट्रेनिंग

सुकमा जिला पंचायत के सीईओ मुकुंद ठाकुर ने बताया कि इस काम के लिए कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को विशेष ट्रेनिंग दी गई है. ट्रेनिंग के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को जंगली खजूर के पेड़ों से सुरक्षित तरीके से रस निकालने और उससे गुड़ तैयार करने की पूरी प्रक्रिया सिखाई. शुरुआत में 2-3 स्वयं सहायता समूहों की करीब 20-30 महिलाओं को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी गई है.

पहल को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी

उन्होंने बताया कि इस पहल को अभी छोटे स्तर पर शुरू किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा सके. सुकमा और आसपास के क्षेत्रों में जंगली खजूर के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, इसलिए यह गतिविधि यहां के लिए काफी संभावनाएं रखती है.

बिना केम‍िकल के बनता है नेचुरल गुड़

इस परियोजना से जुड़ी वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति अनीता नाग ने बताया कि ‘डोला स्वयं सहायता समूह’ की महिलाएं खजूर के रस से शुद्ध और प्राकृतिक गुड़ तैयार कर रही हैं. इस गुड़ को बनाने में किसी भी तरह की अतिरिक्त चीनी या रसायन का उपयोग नहीं किया जाता. महिलाओं को दंतेवाड़ा से आए प्रशिक्षकों ने पेड़ों से रस निकालने और उसके प्रसंस्करण की तकनीक सिखाई.

प्राजेक्‍ट की सदस्‍य ने कही ये बात

परियोजना से जुड़ी प्रोफेशनल रिसोर्स पर्सन आलिया भगत ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पहले पेड़ों की पहचान की गई और फिर विशेषज्ञों ने महिलाओं को रस निकालने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया. इसके बाद महिलाओं ने स्वयं इस प्रक्रिया को अपनाकर गुड़ तैयार करना शुरू किया.

स्वयं सहायता समूह की प्रमुख ने बताया अनुभव

डोला स्वयं सहायता समूह की प्रमुख अन्नू साह ने बताया कि इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया अवसर मिला है. खजूर के रस से बनने वाला यह गुड़ पूरी तरह प्राकृतिक होता है और स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है. प्रशासन द्वारा दी गई ट्रेनिंग और सहयोग से महिलाएं अब इस काम को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं.

ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर गुड़ बेचने की मंशा

प्रशासन की योजना है कि भविष्य में इस उत्पाद की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कर खाद्य सुरक्षा प्रमाणन प्राप्त किया जाए. इसके बाद इस प्राकृतिक गुड़ को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध कराने की तैयारी है. साथ ही इसे सुकमा, ओडिशा सीमा के मलकानगिरी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बाजारों तक पहुंचाने की भी योजना बनाई जा रही है.

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