छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई रफ्तार मिली है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को ₹35,892.90 करोड़ की सहायता दी गई.कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 21 मंडियां e-NAM से जुड़ी हैं और कृषि अवसंरचना निधि में ₹3,026 करोड़ की उपलब्धि दर्ज की गई है.
कोरबा की महिला किसान राजश्री मार्को ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर 1.20 हेक्टेयर में हाइब्रिड टमाटर की खेती से 100-120 टन उत्पादन हासिल किया. उन्होंने एक सीजन में करीब 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली तकनीकी मदद ने उनकी खेती को नई दिशा दी.
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए पचौली की सुगंधित और औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। 8 एकड़ में शुरू हुए प्रायोगिक प्रोजेक्ट में कम लागत, साल में 2-3 कटाई और एक एकड़ से 1.5 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफे की संभावना बताई गई है। जानिए पचौली की खेती, तेल उत्पादन और बाजार से जुड़ी पूरी जानकारी।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 55 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर कम पानी में टमाटर और गोभी का बेहतर उत्पादन हासिल किया.आधुनिक तकनीक से उनकी खेती की लागत घटी और आय में बढ़ोतरी हुई.
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के केराटीकरा गांव के किसान सुखदेव सिदार ने धान का रकबा घटाकर चार एकड़ में सन बीज की खेती शुरू की है. कृषि विभाग और रायगढ़ बीज निगम के सहयोग से उन्हें आधार बीज उपलब्ध कराए गए थे.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना ने सरगुजा के किसान रामसाय की जिंदगी बदल दी. धान बोनस की 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से ट्रैक्टर खरीदकर उन्होंने खेती को आधुनिक बनाया.अब खेती समय पर हो रही है, लागत घटी है और आय बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है.
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले का पारंपरिक सुगंधित विष्णुभोग चावल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है. जिले के 1,500 किसान 600 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं, जबकि महिला स्व-सहायता समूह आधुनिक ब्रांडिंग और पैकेजिंग के जरिए इसकी बिक्री कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर (69%) क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है.किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए गए हैं.सरकार ने खाद-बीज की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं.
छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.अब किसानों को सहकारी समितियों के जरिए ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा मिलेगी. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की 5 समितियों में 11 ड्रोन तैनात किए गए हैं और इस खरीफ सीजन में 50 हजार एकड़ में ड्रोन से खाद और कीटनाशकों के छिड़काव का लक्ष्य रखा गया है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.
बस्तर के किसान खगपति ने वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक कृषि तकनीक, सोलर पंप और कृषि विभाग के प्रशिक्षण की मदद से अपनी सालाना आय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कर ली.जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 113.47 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता, खाद और बीज उपलब्ध कराए हैं.समय पर मिली इस मदद से खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की अनिता वड्डे ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' के सहयोग से वैज्ञानिक मुर्गीपालन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की. मजदूरी से शुरुआत करने वाली अनिता आज 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण हैं.
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत हर दिन औसतन 8 नए सोलर हाउस बन रहे हैं.अब तक 1700 परिवार बिजली बिल में कुल 25.80 लाख रुपये की बचत कर चुके हैं, जबकि 550 से अधिक नए रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं.
धमतरी के केरेमुड़ा में किसानों को ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया.1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधों के वितरण के साथ शुरू हुई इस पहल से कम लागत में अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.
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