बिहान योजना ने बदली छत्‍तीसगढ़ की सिदाय नेताम की किस्‍मत, एक सीजन में खेती से कमाया इतना मुनाफा

बिहान योजना ने बदली छत्‍तीसगढ़ की सिदाय नेताम की किस्‍मत, एक सीजन में खेती से कमाया इतना मुनाफा

कोंडागांव के गट्टीपलना गांव की सिदाय नेताम ने ‘बिहान’ योजना से मिली मदद और प्रशिक्षण के सहारे खेती में नई पहचान बनाई है. आधुनिक तकनीकों से टमाटर, करेला और मक्का उगाकर उन्होंने अच्छी आय हासिल की और अब अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं.

Sidai Netam CG Bihan YojanaSidai Netam CG Bihan Yojana
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 23, 2026,
  • Updated Apr 23, 2026, 12:43 PM IST

छत्‍तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड का गट्टीपलना गांव इन दिनों एक महिला किसान की सफलता के कारण चर्चा में है. कुछ समय पहले तक घर-परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली सिदाय नेताम आज खेती के जरिए मजबूत आमदनी करने वाली उद्यमी किसान बन चुकी हैं. उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नया रास्ता दिखा रही है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने की संभावनाएं मौजूद हैं. सिदाय नेताम ‘शिव शक्ति स्व-सहायता समूह’ से जुड़ी हैं.

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बैंक लिंकेज के माध्यम से मिली 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उनके लिए शुरुआत का अहम आधार बनी. इसके बाद उन्होंने खेती को नए तरीके से करने का निर्णय लिया और ट्रेनिंग लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाना शुरू किया.

मिशन से जुड़कर मिली आधुनिक खेती की ट्रेनिंग

मिशन के अंतर्गत उन्हें इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर और विशेषज्ञों से प्रशिक्षण मिला. इसमें उन्‍हें मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों के साथ बेहतर बीज चयन और फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई. इन तरीकों को अपनाते हुए उन्होंने टमाटर, करेला और पॉपकॉर्न मक्का की खेती शुरू की. शुरुआत में उन्होंने लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश किया, जो उनके लिए बड़ा कदम था.

 डेढ़ लाख लगाने पर 2.1 लाख का हुआ मुनाफा

मेहनत और वैज्ञानिक पद्धतियों के इस्‍तेमाल का परिणाम यह रहा कि एक सीजन में उन्हें करीब 3.60 लाख रुपये की आय हुई. इसमें से लगभग 2.10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला. गांव के स्तर पर यह कमाई उन्हें अलग पहचान दिला रही है. अब उनकी खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि नियमित और बेहतर आमदनी का जरिया बन गई है.

कृषि‍ सखी बनकर अन्‍य मह‍िलाओं को दे रही जानाकरी

सिदाय नेताम की सफलता का असर आसपास के गांवों में भी दिखने लगा है. वे “कृषि सखी” के रूप में अन्य महिलाओं को खेती के आधुनिक तरीकों, जैविक खाद के उपयोग और सिंचाई प्रबंधन के बारे में जानकारी दे रही हैं. सिदाय के मार्गदर्शन से कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर खेती और छोटे व्यवसाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

बिहान योजना से बदल रही मह‍िलाओं की स्थिति

बता दें कि जिले में ‘बिहान’ योजना के जरिए महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं और परिवार, समाज में अपनी भूमिका भी मजबूत कर रही हैं. सिदाय नेताम की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण, वित्तीय मदद और निरंतर कोशिश से ग्रामीण महिलाएं खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती हैं.

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