योगी सरकार ने 'गो संरक्षण' को लेकर तैयार किया सबसे बड़ा रोडमैप, मुख्य सचिव गोयल ने दिए ये निर्देश

योगी सरकार ने 'गो संरक्षण' को लेकर तैयार किया सबसे बड़ा रोडमैप, मुख्य सचिव गोयल ने दिए ये निर्देश

UP News: अपर मुख्य सचिव पशुधन मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि दान द्वारा भूसा संग्रहण में महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट एवं गोरखपुर जनपद अग्रणी हैं. वहीं, क्रय के माध्यम से भूसा संग्रहण में सहारनपुर, देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर, मऊ, जौनपुर, बदायूं, बलिया, मथुरा एवं अलीगढ़ प्रमुख स्थान पर हैं.

yogi government roadmap over cow protection up chief secretary sp goyal issued directionमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कारण प्रदेश के 'गो संरक्षण' को नई दिशा मिल रही हैyogi government roadmap over cow protection up chief secretary sp goyal issued directionमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कारण प्रदेश के 'गो संरक्षण' को नई दिशा मिल रही है
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Apr 23, 2026,
  • Updated Apr 23, 2026, 7:06 AM IST

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष रुचि के कारण प्रदेश के 'गो संरक्षण' को नई दिशा मिल रही है. इसी क्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए. एसपी गोयल ने कहा कि प्रदेश में गो-आश्रय स्थलों का सुदृढ़ संचालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान चलाकर आवश्यकतानुसार दान एवं क्रय के माध्यम से भूसा एकत्रित कर अस्थायी रूप से खरही, कूप, खोप में सुरक्षित रखा जाए.

किसानों से भूसा लेकर मिलेगी गोबर खाद

वहीं, दीर्घकालिक व्यवस्था के लिए स्थायी भूसा बैंकों की स्थापना की जाए. मुख्य सचिव ने यह भी सुझाव दिया कि गो-आश्रय स्थलों में उपलब्ध गोबर से तैयार खाद किसानों को उपलब्ध कराकर उसके बदले भूसा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा. उन्होंने चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि शत-प्रतिशत क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई कराई जाए. साथ ही, चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गोशाला संचालकों एवं किसानों को प्रशिक्षित कराया जाए.

गर्मी और लू से बचाव के निर्देश जारी

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गर्मी और लू से बचाव के मद्देनजर उन्होंने गो-आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल एवं पर्याप्त छाया की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पशु शेडों को बोरे/टाट-पट्टी से ढकने तथा आवश्यकतानुसार शीतलन के उपाय अपनाए जाएं. वहीं, संरक्षित निराश्रित गोवंशों के लिए समुचित चिकित्सा, नियमित टीकाकरण एवं संतुलित भरण-पोषण की व्यवस्था की जाए.उन्होंने सभी गो-आश्रय स्थलों की निगरानी जनपद स्तर पर स्थापित कमांड कंट्रोल रूम के माध्यम की जाए.

फार्मर रजिस्ट्री के पंजीकरण में तेजी लाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण कार्य में अपेक्षित प्रगति लाने के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान किसानों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य नहीं होगी. उन्होंने कहा कि क्रय केंद्रों पर गेहूं विक्रय के लिए आने वाले किसानों को फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण कराने के लिए किसी भी प्रकार का दबाव न बनाया जाए. 

भविष्य में नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

एसपी गोयल ने यह भी कहा कि भविष्य में फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण न कराने वाले किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खाद-बीज सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा फसल बीमा जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है. इसलिए प्रदेश के शत-प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण किसानों को करवा लेना चाहिए.

प्रभावित फसलों का तत्काल दिया जाए मुआवजा 

इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में ओलावृष्टि, अतिवृष्टि एवं अग्निकांड से प्रभावित फसलों के लिए लंबित क्षतिपूर्ति धनराशि का जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शीघ्र वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके. बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुधन मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि दान द्वारा भूसा संग्रहण में महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट एवं गोरखपुर जनपद अग्रणी हैं. वहीं, क्रय के माध्यम से भूसा संग्रहण में सहारनपुर, देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर, मऊ, जौनपुर, बदायूं, बलिया, मथुरा एवं अलीगढ़ प्रमुख स्थान पर हैं.

‘पुण्य की एफडी’ प्रमाण पत्र वितरित

उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी जौनपुर द्वारा भूसा दान करने वाले व्यक्तियों को ‘पुण्य की एफडी’ प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जो सराहनीय पहल है. इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर एवं हरदोई द्वारा गो-आश्रय स्थलों में वाटर मिस्टिंग सिस्टम, पंखे, कूलर एवं फॉगर्स की विशेष व्यवस्था की गई है. हरदोई एवं इटावा जनपद हरे चारे की बुआई में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.

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