
अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री करण सिंह वर्मा का एक बयान सामने आया है. धामंदा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 894 लाडली बहनों को यहां लाभ मिल रहा है और आई कितनी हैं? उन्होंने कहा, एक दिन CEO को बोलकर सबको बुलाएंगे. नहीं आईं तो नाम कट जाएगा. यहां से रिपोर्ट दे दी जाएगी. जो दे रहा है उसका बोलो तो सही. कांग्रेस के समय बहनों को पैसा मिलता था क्या, बताओ? दरअसल, करण सिंह वर्मा बोल रहे थे कि प्रोग्राम में जो महिलाएं आएंगी, उनको ही स्कीम का पैसा दिया जाएगा.
जानकारी के अनुसार, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने गुरुवार को जिले के ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपये की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपये की लागत से बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया. वही धामंदा में उन्होंने संबोधित करते हुए एक बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
बयान में करण सिंह वर्मा यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि हमारी सरकार किसानों को सम्मान निधि दे रही है. हर महीने राशन दिया जा रहा है. लाडली बहनों को पैसा मिल रहा है. यहां 894 महिलाओं को पैसा मिल रहा है, लेकिन आई कितनी हैं? सीईओ को बोलकर सबको बुलाएंगे, नहीं आईं तो नाम कट जाएगा. रिपोर्ट दे देंगे.
वर्मा ने कहा, कांग्रेस लाडली बहना योजना का पैसा देती थी क्या? जो दे रहा है उसका कहें तो सही. कांग्रेस के समय बहनों को पैसा मिलता था क्या? भोपाल, इंदौर की तरह यहां की सड़क बन रही है. सरकारी एक पैसा भी खाना, गौ मांस खाने के बराबर है.
फिर उन्होंने एक राजनीतिक बयान देते हुए कहा, "बहनों, आपको कांग्रेस के राज में पैसे नहीं मिले" और केंद्र सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली से गेहूं भेजते हैं और किसानों के खातों में पैसे जमा करते हैं, फिर भी लोग "ध्यान नहीं दे रहे हैं".
इन टिप्पणियों पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसने इसे "कल्याण के नाम पर जबरदस्ती" बताया और चेतावनी दी कि एक सोशल सिक्योरिटी प्रोग्राम को पालन करवाने के हथियार में बदला जा रहा है.
कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने सत्ताधारी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसे बयान एक खतरनाक मानसिकता को दिखाते हैं.
गुप्ता ने कहा, "बीजेपी सरकार के तहत, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से ऐसे बात की जा रही है जैसे उन्हें भीख मिल रही हो." "ऐसा लगता है कि सरकार उन पर एहसान कर रही है. यह मानसिकता तानाशाही से कम नहीं है. वे लोगों को यह कहकर धमका रहे हैं कि पैसे वापस ले लिए जाएंगे. कानूनी तौर पर वे ऐसा नहीं कर सकते. मंत्री संविधान की शपथ लेते हैं कि अगर वे इस तरह की धमकियां देते हैं, तो यह संवैधानिक शपथ का उल्लंघन होगा. सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मंत्रियों को बर्खास्त कर देना चाहिए. यह मंत्रियों का निजी पैसा नहीं है," उन्होंने आगे कहा.
यह विवाद विजय शाह से जुड़े एक ऐसे ही विवाद के तुरंत बाद आया है, जिन्होंने रतलाम में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के दौरान कहा था कि लाडली बहना योजना के लाभार्थियों को मुख्यमंत्री का "सम्मान" करना चाहिए क्योंकि इस योजना के तहत करोड़ों रुपये बांटे जा रहे हैं, और सुझाव दिया कि जो लोग ऐसा नहीं करेंगे, उनके आवेदन रोके जा सकते हैं.
उन्होंने लाभार्थियों को लाने के लिए खाने का इंतजाम करने की बात कही, जिनके पेमेंट में 250 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, उनकी जांच का इशारा किया, और चेतावनी दी कि आधार कार्ड की समस्याओं से पेमेंट अपने आप बंद हो सकते हैं. इन टिप्पणियों को बड़े पैमाने पर जबरदस्ती और धमकी भरा माना गया.