बांस बनेगा किसानों की कमाई का जरिया, ये सरकार दे रही बंपर सब्सिडी

बांस बनेगा किसानों की कमाई का जरिया, ये सरकार दे रही बंपर सब्सिडी

ये सरकार बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए 27 जिलों में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दे रही है. ऐसे में किसान इस योजना का लाभ लेकर बेहतर कमाई कर सकते हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे दी गई डिटेल को पढ़ें.

बांस की खेतीबांस की खेती
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Feb 02, 2026,
  • Updated Feb 02, 2026, 5:53 PM IST

आज के दौर में अगर कोई फसल सचमुच में ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी ‘हरा सोना’ कहलाने लायक है, तो वो है बांस की खेती. ये सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि आय बढ़ाने, पर्यावरण बचाने और नए उद्योग खड़े करने का जीता-जागता फार्मूला है. बांस की खेती भारत में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली सबसे बड़ी फसलों में से एक है. वहीं, चीन के बाद बांस की खेती के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि किसान बांस की खेती करने से कतरा रहे हैं. इसी को देखते हुए बिहार सरकार की ओर से किसानों को प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत सब्सिडी दी जा रही है. ऐसे में किसान इस योजना का लाभ लेकर बेहतर कमाई कर सकते हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे दी गई डिटेल को पढ़ें.

किसानों को कितनी मिलेगी सब्सिडी?

बिहार कृषि विभाग की ओर से किए गए ट्वीट के मुताबिक, बिहार सरकार किसानों को बांस की खेती करने के लिए बंपर सब्सिडी दे रही है. राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत अगर किसान ज्यादा संख्या में बांस की खेती करते हैं तो एक हेक्टेयर में करीब 1.2 लाख रुपये का खर्च आता है. इस पर सरकार किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दे रही है. यानी सरकार बास की खेती करने के लिए आधा पैसा यानी 60 हजार रुपये खुद देगी.  

27 जिलों में लागू होगी ये योजना

बिहार सरकार कृषि विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत अब बांस की खेती करना और भी आसान हो गया है. इस योजना का मकसद किसानों को बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आमदनी बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बांस की खेती को भी अपनाएं. यह योजना बिहार के 27 जिलों में लागू की जा रही है. इनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चंपारण शामिल हैं.

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा. वहीं, एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों योजना का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते दोनों के नाम अलग-अलग जमीन और भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र हों. घने बांस लगाने के लिए कम से कम 0.04 हेक्टेयर और ज्यादा से ज्यादा 0.2 हेक्टेयर जमीन तय की गई है. वहीं, खेत की मेड़ पर हर किसान को कम से कम 10 बांस के पौधे लगाने होंगे. इसका मतलब ये है कि छोटे और बड़े किसान दोनों अपने खेत में बांस लगाकर सरकार से सहायता ले सकते हैं.

योजना का कैसे उठाएं लाभ?

  • इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन है.
  • इच्छुक लोग बिहार उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
  • वेबसाइट पर ‘राष्ट्रीय बांस मिशन योजना’ लिंक पर क्लिक करें.
  • मांगी गई जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें.
  • आवेदन जमा करने के बाद जिला स्तर पर जांच होगी.
  • योग्य पाए जाने पर ही लाभार्थी को सहायता राशि जारी की जाएगी.

यहां मिलेगी अधिक जानकारी

यदि आप भी बिहार के किसान हैं और बांस की खेती करना चाहते हैं तो इसके लिए सरकार सब्सिडी मुहैया करा रही है. इसके लिए किसान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. इस सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए किसान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के लिंक पर विजिट कर सकते हैं. इसके अलावा किसान अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं.

बांस की खेती क्यों है फायदेमंद?

  • बांस को न ज्यादा खाद की जरूरत होती है, न अधिक सिंचाई की.
  • यह मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन कर लेता है.
  • बंजर या कम उपजाऊ भूमि में भी बांस को आसानी से उगाया जा सकता है.
  • 3–5 साल में पूरी तरह तैयार होता है और कई वर्षों तक लगातार पैदावार देता रहता है.
  • इसकी औद्योगिक मांग अधिक होने के कारण बाजार में अच्छा मूल्य मिलता है.

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