Budget 2026: खेती-पशुपालन के लिए AI टूल, अखरोट-बादाम किसानों की आय बढ़ाने और मछली पालन को बड़ी राहत

Budget 2026: खेती-पशुपालन के लिए AI टूल, अखरोट-बादाम किसानों की आय बढ़ाने और मछली पालन को बड़ी राहत

Budget 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र के लिए AI टूल लॉन्च करने, अखरोट-बादाम किसानों की आय बढ़ाने, पशुपालकों को सब्सिडी और मत्स्य पालन के लिए 500 जलाशयों के विकास की बड़ी घोषणाएं कीं.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 01, 2026,
  • Updated Feb 01, 2026, 4:17 PM IST

इस साल के आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बड़ी घोषणाएं कीं. इन घोषणाओं में कृषि और पशुपालन से जुड़ी तमाम खास बातें हैं. बजट भाषण में सीतारमण ने कहा, देश में कृषि और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए AI टूल लॉन्च करने का प्रस्ताव है. सरकार अखरोट, बादाम, पाइन नट किसानों की आय बढ़ाने पर काम करेगी. इसका मकसद है अखरोट, बादाम, पाइन नट के कम उपज वाले बागों को फिर से जीवंत करना और किसानों की कमाई बढ़ाना. 

निर्मला सीतारमण ने कहा, चंदन की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के साथ साझेदारी की जाएगी. काजू, कोको में आत्मनिर्भरता के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्ताव है. नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष योजना शुरू की जाएगी. तटीय क्षेत्रों में नारियल, काजू जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों को बढ़ाने की योजना पर काम होगा. 

बजट के मुताबिक, पशुपालन के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. इसमें पशुपालकों को सब्सिडी की सुविधा दी जाएगी. तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा. मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 500 जलाशयों को विकसित किया जाएगा.

काजू, नारियल, चंदन की खेती

देश में काजू, नारियल और चंदन की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. तटीय राज्यों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी इन नकदी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. 

काजू की जहां तक बात है तो इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गोवा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल. बजट की घोषणा से इन राज्यों के किसानों को मदद मिलेगी. काजू की खेती और प्रोसेसिंग का सेक्टर 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है, खासकर प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं को. काजू के पेड़ों पर 3-5 साल में फल लगने लगते हैं, और 8-12 साल में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है. चूंकि यह फसल कम दिनों में तैयार हो जाती है, इसलिए सरकार इसकी खेती पर फोकस कर रही है. कटाई नवंबर से जून के बीच होती है, और सबसे ज्यादा उत्पादन गर्मियों की शुरुआत में होता है.

नारियल किसानों के लिए ऐलान

सरकार ने तटीय राज्यों में नारियल की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को मदद देने का ऐलान किया है. इसमें केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य अहम हैं. भारत दुनिया में नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसमें 90% से ज्यादा खेती केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में होती है. यह गर्म मौसम में अच्छी तरह उगता है और इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली, रेतीली दोमट मिट्टी की जरूरत होती है, और 5-7 साल पुराने पेड़ों से सबसे अच्छी पैदावार मिलती है. मुख्य तरीकों में सही सिंचाई (हर पेड़ को रोज़ 16-18 लीटर पानी), इंटरक्रॉपिंग (केले, काली मिर्च) और गैंडा बीटल जैसे कीटों को कंट्रोल करना शामिल है.

नारियल का केरल में सबसे ज्यादा इलाका है, लेकिन प्रोडक्टिविटी के मामले में तमिलनाडु आगे है. दूसरे बड़े, लेकिन गैर-पारंपरिक इलाकों में असम, त्रिपुरा और तटीय महाराष्ट्र शामिल हैं. नारियल "कल्पवृक्ष" (स्वर्ग का पेड़) होने के नाते, यह अपने फल, तेल, खोपरा और नारियल के रेशे से लाखों लोगों की रोजी-रोटी चलाता है. कोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड खेती को बढ़ावा देने में, खासकर नए इलाकों में, अहम भूमिका निभाता है.

चंदन की खेती को बढ़ावा

सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि देश में चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा. भारत में चंदन की खेती एक बहुत ज्यादा मुनाफे वाला, लंबे समय का इन्वेस्टमेंट (15-20 साल) है, जो मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में होता है, हालांकि यह दूसरे राज्यों में भी फैल रहा है. इसके लिए पेड़ों को राज्य के वन विभाग में रजिस्टर करवाना होता है, और कटाई उनकी देखरेख में की जाती है.

चंदन की खेती में ज्यादा रिटर्न की संभावना है, मैनेजमेंट और बाजार की कीमतों के आधार पर 15-20 सालों में प्रति एकड़ 1.5-3.5 करोड़ रुपये का अनुमानित नेट मुनाफा हो सकता है. नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बिक्री आमतौर पर खुले बाजार के बजाय सरकार द्वारा चलाई जाने वाली नीलामी के जरिए की जाती है.

खेती में AI Tool का विस्तार

खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े कदम के तहत, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में 'भारत विस्तार' लॉन्च करने की घोषणा की. यह एक मल्टीलिंगुअल (कई भाषाओं) AI टूल है जो एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR की कृषि पद्धतियों को एडवांस्ड AI सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेगा, जिससे किसानों के संसाधन एक्सेस करने और फैसले लेने के तरीके में बदलाव आएगा. यह प्लेटफॉर्म खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा, जोखिम कम करने के लिए कस्टमाइज्ड सलाह देगा, और लाखों किसानों को जमीनी स्तर पर बेहतर विकल्प चुनने में मदद करेगा, जो खेती में AI इंटीग्रेशन के लिए सरकार के विजन के अनुरूप है. 

सीतारमण ने कहा, इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन को भी मजबूत समर्थन दिया जाएगा. एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. पशुधन उद्यमों का विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर रहेगा. पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री-केंद्रित इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन का बेहतर निर्माण और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाएगा.

केंद्रीय बजट 2026: कृषि क्षेत्र के लिए मुख्य घोषणाएं

किसानों की आय बढ़ाना: उत्पादकता बढ़ाने और उद्यमिता के जरिए किसानों की कमाई बढ़ाने पर फोकस, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष जोर दिया गया है.
मत्स्य पालन विकास: 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, और स्टार्ट-अप, महिला-नेतृत्व वाले समूहों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को शामिल करते हुए बाजार से संपर्क बढ़ाना.
पशुपालन और पशुधन: क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता के लिए समर्थन, पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण और विस्तार, एकीकृत डेयरी, मुर्गी पालन और पशुधन मूल्य श्रृंखला का निर्माण, और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना.
उच्च मूल्य वाली फसलें और विविधीकरण: खेती की पैदावार में विविधता लाने और आय बढ़ाने के लिए नारियल, काजू, कोको, चंदन, अगर के पेड़ और मेवे (बादाम, अखरोट, पाइन नट्स) जैसी फसलों के लिए समर्थन.
क्षेत्र-विशिष्ट कार्यक्रम: पहलों में एक नारियल संवर्धन योजना, 2030 तक निर्यात और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित काजू और कोको कार्यक्रम, और राज्य भागीदारी के साथ एक चंदन इकोसिस्टम तंत्र को बढ़ावा देना शामिल है.
बागों का कायाकल्प और युवा जुड़ाव: पुराने बागों का कायाकल्प और वैल्यू एडिशन और युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए हाई डेंसिटी वाली खेती का विस्तार.
टेक्नोलॉजी और सहकारी समितियां: उत्पादकता में सुधार के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR के कार्यक्रमों को एकीकृत करने वाले मल्टीलिंगुअल AI सलाहकार उपकरण 'भारत-विस्तार' का शुभारंभ. साथ ही संघीय सहकारी समितियों या सरकारी संस्थाओं को इनपुट की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए टैक्स में लाभ.

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