घाटे की खेती छोड़ अपनाया यह फॉर्मूला, आज मछली, मुर्गी और फलों से बरस रहा है पैसा!

घाटे की खेती छोड़ अपनाया यह फॉर्मूला, आज मछली, मुर्गी और फलों से बरस रहा है पैसा!

बालाघाट के सुरेंद्र जैतवार ने RAD योजना का लाभ लेकर खेती को विविधीकृत कृषि मॉडल में बदला. एक ही खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, फलोद्यान, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं. खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे भी लगाए गए हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • बालाघाट ,
  • Sep 30, 2026,
  • Updated Sep 30, 2026, 8:26 AM IST

खेती में नवाचार और विविधीकरण किसानों के लिए आमदनी के नए रास्ते खोल सकता है. इसका उदाहरण बालाघाट जिले की वारासिवनी तहसील के ग्राम भांडी निवासी किसान सुरेंद्र जैतवार हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, फलोद्यान, सब्जियों और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़कर अपने खेत को विविधीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल के रूप में विकसित किया है. कृषि विभाग की RAD (Rainfed Area Development) योजना से मिले सहयोग ने भी इस मॉडल को विकसित करने में मदद की.

सुरेंद्र जैतवार ने खेती को केवल अनाज और पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपने खेत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़ा है. उनके खेत में मछलीपालन के लिए तालाब, मुर्गीपालन, पशुपालन, वर्मी टांका, फलोद्यान और विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है.इस तरह खेत में कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्यपालन को जोड़कर एक समन्वित कृषि प्रणाली तैयार की गई है.

खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे

सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विभिन्न प्रकार के फलदार और उपयोगी पौधे लगाए हैं. इनमें सागौन, नीलगिरी (लिप्टन), काजू, हाथीफल, आम, केला, सेलवट और अमरूद सहित कई प्रजातियां शामिल हैं.खेत में ऐसे पौधों की संख्या 100 से अधिक बताई गई है.

इसके अलावा उन्होंने नींबू की अलग-अलग किस्मों का भी रोपण किया है. फलदार पौधों के साथ अन्य उपयोगी प्रजातियों को शामिल करने से खेत में विविधता बढ़ी है और भविष्य में अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने की संभावनाएं भी बनी हैं.

तालाब में मछलीपालन, मुर्गीपालन भी बना खेती का हिस्सा

सुरेंद्र जैतवार के खेत में बने तालाब में मछलीपालन भी किया जा रहा है. यहां रूपचंदा, जलगा और पित्ती सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है. इससे पारंपरिक फसलों के अलावा मत्स्यपालन के माध्यम से भी आय का विकल्प तैयार हुआ है.

वहीं, उन्होंने कड़कनाथ, ब्रॉयलर और देसी मुर्गे-मुर्गियों का पालन भी शुरू किया है.कृषि के साथ मुर्गीपालन और मछलीपालन को जोड़कर उन्होंने अपने खेत को बहुआयामी स्वरूप दिया है.

हल्दी के साथ सिंघाड़ा और जिमीकंद की खेती

सुरेंद्र जैतवार खेती में नए प्रयोग करने पर भी जोर देते हैं. उनके खेत में हल्दी की खेती की जा रही है. इस वर्ष उन्होंने खेती में विविधता बढ़ाते हुए सिंघाड़ा और सूरन (जिमीकंद) की खेती की दिशा में भी कदम बढ़ाया है.

इस तरह उनके खेत में एक ओर पारंपरिक और अन्य फसलों की खेती हो रही है, वहीं दूसरी ओर फलदार पौधे, उपयोगी प्रजातियां, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं.

RAD योजना से मिला विविधीकृत खेती को बढ़ावा

कृषि विभाग की RAD योजना के माध्यम से मिले सहयोग का उपयोग कर सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विविधीकृत कृषि प्रणाली को विकसित किया है. उनका प्रयास है कि खेत में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए और खेती के साथ ऐसी गतिविधियां जोड़ी जाएं, जिनसे किसान को अलग-अलग समय पर आय के अवसर मिल सकें.

सुरेंद्र जैतवार का यह प्रयास बताता है कि किसान यदि अपनी पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, फलोद्यान और अन्य कृषि गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से जोड़ें, तो खेत को एकीकृत कृषि प्रणाली के रूप में विकसित किया जा सकता है.

ग्राम भांडी के किसान सुरेंद्र जैतवार ने कृषि विभाग की योजना का लाभ लेकर अपने खेत में इस तरह के प्रयोग किए हैं. उनका कहना है कि खेती में विविधता और नवाचार अपनाने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है. उनका खेत किसानों के लिए यह संदेश देता है कि एक ही कृषि गतिविधि पर निर्भर रहने के बजाय खेती से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों को जोड़कर आय के कई विकल्प तैयार किए जा सकते हैं.

 

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