Farmer ID रजिस्‍ट्रेशन के लिए मात्र इतने घंटे बचे, बिहार के किसानों के पास आखिरी मौका, अफसरों ने किया आगाह

Farmer ID रजिस्‍ट्रेशन के लिए मात्र इतने घंटे बचे, बिहार के किसानों के पास आखिरी मौका, अफसरों ने किया आगाह

बिहार के किसानों के पास फार्मर आईडी बनवाने का आखिरी मौका है. राज्‍य के 38 जिलों में मिशन मोड में रजिस्ट्रेशन चल रहा है. पंचायत भवनों में विशेष शिविर लग रहे हैं. प्रशासन ने किसानों से जल्‍द रजिस्‍ट्रेशन कराने की अपील करते हुए चेतावनी भी दी है.

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अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Jan 09, 2026,
  • Updated Jan 09, 2026, 3:34 PM IST

बिहार में फार्मर आईडी बनवाने की डेडलाइन अब खत्म होने वाली है. राज्य सरकार ने किसानों को आखिरी मौका देते हुए रजिस्ट्रेशन की तारीख 10 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी है. राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने साफ कहा है कि तय समय में रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराने पर किसानों को आगे सरकारी योजनाओं के लाभ में दिक्कत हो सकती है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मुताबिक 6 जनवरी से पूरे राज्य में फार्मर आईडी बनाने का काम कैंप मोड में किया जा रहा है.

किसानों की सुविधा को देखते हुए इसे एक दिन और बढ़ाया गया है. अब 9 और 10 जनवरी को राज्य की सभी पंचायतों में पंचायत भवनों पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां किसान सीधे पहुंचकर अपना फार्मर आईडी निबंधन करा सकते हैं. यानी किसानों के पास 48 घंटे से भी कम समय बचा है.

फार्मर आईडी से किसानों को क्या फायदा मिलेगा?

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को पीएम किसान योजना की राशि सीधे बैंक खाते में मिलेगी. इसके अलावा कृषि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ भी पात्र किसानों को आसानी से मिल सकेगा. रजिस्ट्रेशन के दौरान जमाबंदी का शुद्धिकरण भी किया जा रहा है, जिससे भूमि रिकॉर्ड में सुधार होगा और आगे किसी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं आएगी.

शिविर में क्या-क्या दस्तावेज जरूरी ?

फार्मर आईडी रजिस्‍ट्रेशन के लिए किसानों से अपील की गई है कि वे शिविर में आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और लगान रसीद जरूर साथ लेकर आएं. बिना इन दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो सकती है.

38 जिलों में मिशन मोड में काम

विभाग ने एक बार फिर किसानों से अनुरोध किया है कि वे तय तिथि के भीतर अपने पंचायत भवन में आयोजित शिविर में पहुंचकर फार्मर आईडी निबंधन जरूर कराएं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहे.

सरकार का फार्मर ID पर इतना जोर क्‍यों ?

फार्मर आईडी किसानों के लिए सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि भविष्य की खेती से जुड़ा डिजिटल आधार बनने जा रहा है. इसके जरिए किसान की जमीन, फसल, पशुपालन और खेती से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहती है, जिससे बार-बार कागजात देने की जरूरत खत्म हो जाती है.

आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकार की ज्यादातर योजनाओं में आवेदन, सत्यापन और भुगतान इसी आईडी से जुड़े होंगे. इससे फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी और असली किसानों तक मदद तेजी से पहुंचेगी. खास बात यह है कि महिला किसान, बटाईदार और पट्टेदार किसान भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे उन्हें भी सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा मिलने का रास्ता खुलेगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1: Farmer ID बनवाना क्या सभी किसानों के लिए जरूरी है?
हां, आने वाले समय में पीएम किसान और कृषि विभाग की ज्यादातर योजनाओं का लाभ Farmer ID के बिना नहीं मिलेगा.

2: जिन किसानों के नाम जमीन नहीं है, क्या वे भी Farmer ID बनवा सकते हैं?
हां, राज्य सरकार की नीति के अनुसार बटाईदार और पट्टेदार किसानों को भी Farmer ID में शामिल किया जा सकता है.

3: Farmer ID बनने के बाद बार-बार कागज देने पड़ेंगे क्या?
नहीं, Farmer ID बनने के बाद जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी पहले से डिजिटल रिकॉर्ड में रहती है.

4: Farmer ID महिला किसान के नाम बनेगी या परिवार के मुखिया के नाम?
अगर जमीन या खेती महिला किसान के नाम दर्ज है, तो Farmer ID सीधे उनके नाम से बनाई जा सकती है.

5: Farmer ID नहीं बनवाने पर क्या नुकसान हो सकता है?

भविष्य में किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, MSP खरीद और सब्सिडी जैसी योजनाओं में दिक्कत आ सकती है.

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