जमीन विवाद सुलझाने के लिए बिहार सरकार का बड़ा कदम, शिकायत निपटारे पर होगी सख्त निगरानी

जमीन विवाद सुलझाने के लिए बिहार सरकार का बड़ा कदम, शिकायत निपटारे पर होगी सख्त निगरानी

बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया है. इसका मकसद शिकायतों का समय से और क्वालिटी के साथ निपटारा सुनिश्चित करना है.

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अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • पटना,
  • May 20, 2026,
  • Updated May 20, 2026, 6:51 PM IST

बिहार में जमीन से जुड़े विवाद अक्सर अपराध और तनाव की बड़ी वजह बनते रहे हैं. ऐसे मामलों के बढ़ते बोझ को देखते हुए राज्य सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम लोगों की शिकायतों के तेज और प्रभावी समाधान के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन कर दिया है. सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था के जरिए जन शिकायत पोर्टल पर आने वाले मामलों का समय से और क्वालिटी के साथ निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे लोगों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

मंत्री के निर्देश पर लागू हुई नई व्यवस्था

यह पहल राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर की गई है. मंत्री ने साफ कहा है कि शिकायतों के निपटारे में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. दरअसल, पहले कई अधिकारियों के तबादले के कारण शिकायतों के निपटारे में देरी हो रही थी. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तुरंत नया मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया.

9 अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

इस मॉनिटरिंग सेल में राजस्व सेवा के 9 अधिकारियों को शामिल किया गया है. जिनमें कमल नयन कश्यप, संतोष कुमार चौधरी, मो. एजाज आलम, सक्षम सिंह, धीरज कुमार, विजय कुमार राय, पंकज कुमार झा, मनोज कुमार गुप्ता और अनुजा सिन्हा शामिल हैं.

इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे लंबित शिकायतों को तुरंत देखें, आईटी सिस्टम के जरिए निगरानी रखें और तय समय सीमा में समाधान करें.

टेक्नोलॉजी के जरिए होगी सख्त निगरानी

इस पूरी व्यवस्था के लिए डॉ. सुनील कुमार (उप सचिव) को नोडल अधिकारी बनाया गया है. एनआईसी (National Informatics Centre) के माध्यम से तकनीकी सिस्टम मजबूत किया जा रहा है. शिकायत दर्ज करने से लेकर समाधान तक की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी और हर मामले की ट्रैकिंग संभव होगी.

लंबित मामलों में मिलेगी राहत

यह नई पहल उन हजारों लोगों के लिए राहत मानी जा रही है जिनके मामले लंबे समय से फंसे हैं, जैसे जमीन विवाद, नामांतरण (Mutation), सीमांकन (Land demarcation) और खाता-खेसरा सुधार. अब सरकार का लक्ष्य है कि हर शिकायत का समय पर और संतोषजनक समाधान हो.

जमीन पर कितना असर होगा?

हालांकि सरकार ने इसे बड़ी पहल बताया है, लेकिन असली परीक्षा इसके जमीनी स्तर पर लागू होने में है. क्या अधिकारी समय पर कार्रवाई करेंगे? क्या भ्रष्टाचार और देरी खत्म होगी? क्या आम लोगों को वास्तव में राहत मिलेगी? यह आने वाले समय में साफ होगा.

बिहार सरकार की यह पहल जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है. यदि यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो इससे न सिर्फ मामलों का तेजी से निपटारा होगा, बल्कि अपराध और विवादों में भी कमी आ सकती है.

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