
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार से मराठवाड़ा में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है. उन्होंने किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की. रोहित पवार ने रविवार को धाराशिव, बीड और लातूर का दौरा कर किसानों से मुलाकात की. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण मराठवाड़ा के आठ जिलों में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. उन्होंने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए तत्काल राहत, चारा शिविर और अन्य जरूरी इंतजाम करने की मांग की.
रोहित पवार ने कहा कि कई इलाकों में अभी तक फसल नुकसान के पंचनामे शुरू नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारियों से बातचीत में उन्हें बताया गया कि सरकार की ओर से अभी तक जरूरी आदेश जारी नहीं हुए हैं. पवार ने कहा कि पहले सूखा घोषित किया जाना चाहिए और इसके बाद फसल नुकसान का आकलन कर किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए.
रोहित पवार ने कहा कि दौरे के दौरान किसानों ने उन्हें फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि लातूर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार बारिश की कमी करीब 40 प्रतिशत है, जबकि किसानों के आकलन के मुताबिक यह कमी लगभग 60 प्रतिशत तक है.
विधायक ने कहा कि किसानों को फसल बीमा से मिलने वाले मुआवजे के अलावा 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रत्यक्ष सहायता दी जानी चाहिए. उन्होंने खेत मजदूरों के लिए भी 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की. साथ ही पिछले वर्ष की लंबित सहायता राशि तत्काल जारी करने की मांग की.
रोहित पवार ने दावा किया कि बड़ी संख्या में किसान अभी भी कर्जमाफी योजना के लाभ से वंचित हैं. उन्होंने सरकार से ऐसे किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करने और उन्हें योजना का लाभ देने की मांग की.
पवार ने मराठवाड़ा में अगले कुछ दिनों के भीतर चारा शिविर शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चारे की कमी रहने पर किसानों को अपना पशुधन मजबूरी में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है. इससे पशुपालन और डेयरी से होने वाली उनकी आय भी प्रभावित होगी.
रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार से तत्काल सूखा घोषित करने और पांच से छह दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाकर मराठवाड़ा की स्थिति पर चर्चा करने की मांग की.
मैदानी दौरे के दौरान कुछ अधिकारियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने या रील बनाने की खबरों का भी पवार ने जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी किसानों की समस्याओं को समझने के बजाय ऐसी गतिविधियों में लगे पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
रोहित पवार ने पड़ोसी कर्नाटक में फसल बीमा की राशि जारी किए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया. उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में किसानों के लिए इसी तरह की राहत की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा सकती.
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने शनिवार को कहा था कि कम बारिश और लंबे समय तक जारी शुष्क मौसम के कारण मराठवाड़ा की 76 तहसीलों में फसलों पर असर पड़ा है. उन्होंने क्षेत्र में चारे और पीने के पानी की कमी की आशंका भी जताई थी. (पीटीआई)