शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के खिलाफ हिंगोली में किसानों का हल्ला, मंत्री के काफिले का रास्ता रोका

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के खिलाफ हिंगोली में किसानों का हल्ला, मंत्री के काफिले का रास्ता रोका

महाराष्ट्र के हिंगोली में प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में सैकड़ों किसानों ने प्रदर्शन किया. किसानों ने मंत्री नरहरी झिरवल से मुलाकात की मांग करते हुए सड़क पर धरना दिया और काफिले का रास्ता रोका. किसानों का कहना है कि सरकार

हिंगोली में किसानों का प्रदर्शनहिंगोली में किसानों का प्रदर्शन
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 17, 2026,
  • Updated Sep 17, 2026, 3:00 PM IST

महाराष्ट्र के हिंगोली में प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध तेज हो गया है. गुरुवार को बड़ी संख्या में किसानों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने हिंगोली शहर में प्रदर्शन किया. किसानों ने अपनी जमीन अधिग्रहण को लेकर नाराजगी जताई और सरकार से अपनी मांगों पर बातचीत करने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने उस सड़क को भी रोक दिया, जहां से पालकमंत्री नरहरी झिरवल का काफिला कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाला था.

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध

हिंगोली में किसान प्रस्तावित नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि उनकी खेती की जमीन उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है. ऐसे में जमीन अधिग्रहण होने से उनकी खेती और रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है. शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की परियोजना के लिए महाराष्ट्र के कई जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचनाएं जारी की गई हैं.

मंत्री के कार्यक्रम स्थल के पास किसानों का प्रदर्शन

गुरुवार को हिंगोली में मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के कार्यक्रम के दौरान किसानों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन स्थल शहीद स्मारक पार्क के पास था, जहां पालकमंत्री नरहरी झिरवल को ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होना था. किसानों ने कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाली सड़क पर बैठकर अपना विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों ने मंत्री से मुलाकात करने की मांग की. इसके चलते कुछ समय के लिए मंत्री के काफिले का रास्ता भी प्रभावित हुआ.

बैरिकेड हटाने को लेकर पुलिस से हुई बहस

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सड़क खाली कराने की कोशिश की. इसी दौरान किसानों और पुलिस के बीच मामूली टकराव की स्थिति बनी. प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड को हटाने की कोशिश की. किसानों का कहना था कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और इस मुद्दे पर सीधे बातचीत चाहते हैं.

मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का किसानों का दावा

किसानों का कहना है कि शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को लेकर उनकी चिंताओं पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था. किसानों के मुताबिक, उन्हें पालकमंत्री नरहरी झिरवल की ओर से मुलाकात कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक यह बैठक नहीं हो पाई है. इसी मांग को लेकर किसानों ने गुरुवार को मंत्री से मिलने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर सरकार को किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए.

क्या है शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना?

महाराष्ट्र का शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे एक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य वर्धा जिले के पवनार से सिंधुदुर्ग जिले के पत्रादेवी तक सड़क संपर्क विकसित करना है. परियोजना की लंबाई को लेकर अलग-अलग चरणों में अलग आंकड़े सामने आए हैं. 2025 में महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी के समय इसे करीब 802.6 किलोमीटर का बताया गया था. इस एक्सप्रेसवे से महाराष्ट्र के 12 जिलों को जोड़ने की योजना बताई गई है. इनमें वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग शामिल हैं.

जमीन अधिग्रहण को लेकर पहले भी उठता रहा है विरोध

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को लेकर किसानों का विरोध नया नहीं है. अलग-अलग जिलों में किसान जमीन अधिग्रहण और प्रस्तावित मार्ग को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं. 2026 में भी हिंगोली के चोंडी गांव में किसानों ने जमीन की माप प्रक्रिया का विरोध किया था, जिसके बाद वहां माप का काम रोक दिया गया था. सरकारी स्तर पर इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है. जून 2026 में कोल्हापुर और सोलापुर समेत कई जिलों में परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचनाएं जारी की गई थीं.

किसानों की मुख्य चिंता क्या है?

प्रदर्शन कर रहे किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेती की जमीन को लेकर है. किसानों का कहना है कि जमीन चली गई तो खेती से होने वाली उनकी नियमित आय प्रभावित हो सकती है. इसी वजह से वे परियोजना से जुड़े जमीन अधिग्रहण के फैसले पर सरकार के साथ बातचीत करना चाहते हैं. इससे पहले भी परियोजना का विरोध कर रहे किसान जमीन और अपनी आजीविका से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से परियोजना को सड़क संपर्क और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजना के रूप में बताया गया है.

मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस पर हुआ प्रदर्शन

17 सितंबर को महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में मुक्ति संग्राम दिवस मनाया जाता है. यह दिन 1948 में हैदराबाद निजाम के शासन से मराठवाड़ा के मुक्त होने की घटना की याद में मनाया जाता है. हिंगोली में भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था और पालकमंत्री नरहरी झिरवल को ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होना था. इसी कार्यक्रम के दौरान किसानों ने शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया. अब किसानों की मांग है कि सरकार उनकी आपत्तियों पर बातचीत करे और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर उन्हें स्पष्ट जानकारी दी जाए.

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