पंजाब में किसानों का 6 घंटे ‘रेल रोको’ आंदोलन, 20 ट्रेनें प्रभावित, कर्ज माफी समेत कई मांगों पर अड़े

पंजाब में किसानों का 6 घंटे ‘रेल रोको’ आंदोलन, 20 ट्रेनें प्रभावित, कर्ज माफी समेत कई मांगों पर अड़े

पंजाब में किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसानों ने कर्ज माफी समेत अपनी मांगों को लेकर पांच जगहों पर करीब छह घंटे तक रेलवे ट्रैक जाम किया. रेल रोको आंदोलन के कारण नई दिल्ली-अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस समेत 20 ट्रेनें प्रभावित हुईं. अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने प्रदर्शन खत्म किया और अब 24 सितंबर को किसान नेताओं और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के बीच बैठक होगी.

Punjab Farmers ProtestPunjab Farmers Protest
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 18, 2026,
  • Updated Sep 18, 2026, 12:20 PM IST

पंजाब में गुरुवार को किसानों ने राज्य सरकार पर बातचीत करने और कर्ज माफी समेत अपनी मांगों को पूरा करने का दबाव बनाने के लिए पांच जगहों पर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया, जिससे नई दिल्ली-अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस समेत 20 ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई.

किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लगभग छह घंटे तक रेल रोको आंदोलन किया. उन्होंने यह आंदोलन तब खत्म किया जब अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि 24 सितंबर को उनके नेताओं और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के बीच उनकी मांगों पर चर्चा के लिए बैठक होगी.

किसान दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक अमृतसर के देवीदासपुरा, पठानकोट के झखोलहारी रेलवे क्रॉसिंग, मोगा के डगरू, फिरोजपुर के मल्लांवाला और संगरूर के सुनाम में रेलवे ट्रैक पर बैठे रहे.

6 घंटा प्रदर्शन, 20 ट्रेनें प्रभावित

छह घंटे के इस विरोध प्रदर्शन से रेल सेवा बाधित हुई और 20 ट्रेनें प्रभावित हुईं.

अधिकारियों के अनुसार, चार ट्रेनें रद्द कर दी गईं, सात का रूट बदला गया, तीन को बीच में ही रोक दिया गया (शॉर्ट-टर्मिनेटेड), चार को बीच के स्टेशन से शुरू किया गया (शॉर्ट-ऑरिजिनेटेड) और दो का समय बदला गया.

रद्द की गई ट्रेनों में ब्यास-तरनतारन DMU (अप और डाउन) (74605 और 74606) और फिरोजपुर कैंट-जालंधर सिटी ट्रेनें (74936 और 74937) शामिल थीं.

रूट बदली गई ट्रेनों में अमृतसर-न्यू जलपाईगुड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस (14664), अमृतसर-जयनगर शहीद एक्सप्रेस (14674), अमृतसर-अजमेर एक्सप्रेस (19612), नांगल डैम-अमृतसर एक्सप्रेस (अप और डाउन, 14505 और 14506), जम्मू तवी-भगत की कोठी एक्सप्रेस (14804) और नई दिल्ली-अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस (12031) शामिल थीं. लुधियाना-छेहरटा DMU (64551) को जंडियाला में, नई दिल्ली-अमृतसर शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस (12497) को जालंधर में और लुधियाना-फिरोजपुर DMU (54051) को मोगा में ही रोक दिया गया.

चार ट्रेनों -- छेहरटा-लुधियाना DMU (64552), अमृतसर-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस (12032), अमृतसर-नई दिल्ली शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस (12498) और फिरोजपुर-लुधियाना DMU (54052) को उनके तय शुरुआती स्टेशन के बजाय किसी दूसरे स्टेशन से चलाया गया. दो फिरोजपुर-जालंधर DMU सेवाओं (74936 और 74938) का समय बदला गया.

रेल सेवा ठप, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

रेलवे के कामकाज में हुए इन बदलावों से काम, कारोबार, इलाज, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों पर असर पड़ा.

जिन यात्रियों की ट्रेनें रास्ते में ही रोक दी गईं या उनका रूट बदल दिया गया, उन्हें अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ा और कुछ मामलों में अपनी पहले से तय यात्रा की योजना भी बदलनी पड़ी.

छावनी इलाके में रहने वाले कमल मित्तल, जो जालंधर जा रहे थे, ने बताया कि उन्हें काम से जुड़े एक जरूरी काम के लिए जाना था, लेकिन रेलवे स्टेशन पर पता चला कि विरोध-प्रदर्शन की वजह से ट्रेन नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए बस से यात्रा करनी होगी.

किसानों ने इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (बॉर्डर रेंज) गुरप्रीत सिंह भुल्लर, अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदर सिंह और दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक के बाद रेल रोको आंदोलन खत्म करने का फैसला किया.

इस बात पर सहमति बनी कि किसान नेता 24 सितंबर को चंडीगढ़ में कृषि मंत्री से मिलेंगे.

किसान संगठनों की क्या है प्रमुख मांगें? 

KMM नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि डिप्टी कमिश्नर के भरोसे के मुताबिक, कर्ज की वजह से आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 3-3 लाख रुपये और खेत मजदूरों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये दिए जाएंगे.

उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि पिछले आंदोलनों के दौरान मारे गए किसानों और मजदूरों के परिवारों को नौकरी और मुआवजा एक महीने के अंदर दिया जाएगा. KMM के अनुसार, बैठक में पराली जलाने, पुलिस और रेलवे से जुड़े मामलों को सुलझाने पर भी सहमति बनी.

एक बयान के मुताबिक, बाद में डिप्टी कमिश्नर ने खुद विरोध स्थल पर किसानों को संबोधित किया और बातचीत में निकले नतीजों के बारे में उन्हें जानकारी दी.

विरोध कर रहे किसानों ने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में पांच फसलों (बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसानों और खेतिहर मजदूरों का कर्ज माफ करना और लैंड-पूलिंग पॉलिसी को वापस लेना शामिल है.

अन्य मांगों में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना, शंभू और खनौरी विरोध स्थलों से कथित तौर पर जब्त या ले जाए गए वाहनों और अन्य सामानों को वापस करना, और खेती करने वाले सभी श्रेणी के किसानों और मजदूरों को मालिकाना हक देना शामिल है.(PTI)

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