चंद्रपुर में किसानों का ‘आक्रोश’, हजारों ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे अन्नदाता, धान के भाव और बोनस की मांग

चंद्रपुर में किसानों का ‘आक्रोश’, हजारों ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे अन्नदाता, धान के भाव और बोनस की मांग

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में धान उत्पादक किसानों ने उचित भाव, बोनस और सिंचाई के लिए पानी की मांग को लेकर आक्रोश ट्रैक्टर मार्च निकाला. नागभीड़, तळोधी और ब्रह्मपुरी के हजारों किसान ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे. किसानों ने टूटे तालाबों की मरम्मत, घोसीखुर्द डैम का पानी घोड़ाजरी तालाब में छोड़ने और लंबित बोनस देने की मांग की.

चंद्रपुर में गूंजा किसानों का आक्रोशचंद्रपुर में गूंजा किसानों का आक्रोश
क‍िसान तक
  • Chandrapur,
  • Sep 18, 2026,
  • Updated Sep 18, 2026, 11:23 AM IST

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में धान उत्पादक किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दिया. धान का उचित भाव, बोनस और खेती से जुड़ी दूसरी समस्याओं को लेकर नागभीड़ में किसानों ने ‘आक्रोश ट्रैक्टर मार्च’ निकाला. नागभीड़, तळोधी और ब्रह्मपुरी तहसील से बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टर लेकर इस मार्च में पहुंचे. किसानों के सड़क पर उतरने से पूरे इलाके में आंदोलन का माहौल दिखाई दिया.

हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ किया प्रदर्शन

नागभीड़ में निकाले गए इस ट्रैक्टर मार्च में बड़ी संख्या में धान उत्पादक किसान शामिल हुए. किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर पहुंचे और सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं. किसानों के हाथों में अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां थीं. इस दौरान किसानों ने नारेबाजी भी की. किसानों का कहना है कि धान की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी उपज का उन्हें उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिल रहा है. ऐसे में खेती करना किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. किसानों ने सरकार से धान पर बोनस देने और उनकी फसल का उचित भाव तय करने की मांग की.

खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी

आंदोलन में शामिल किसानों ने धान के दाम और बोनस के साथ सिंचाई की समस्या भी उठाई. किसानों का कहना है कि उनके इलाके में कई तालाब टूटे हुए हैं. इन तालाबों का काम ठेकेदारों की ओर से किया गया, लेकिन किसानों के मुताबिक काम सही तरीके से नहीं हुआ. इसकी वजह से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. किसानों ने बताया कि पानी नहीं मिलने से उनके खेत सूख रहे हैं और फसल पर भी इसका असर पड़ रहा है. किसानों की मांग है कि घोसीखुर्द डैम का पानी घोड़ाजरी तालाब में छोड़ा जाए, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके और उनकी फसल बचाई जा सके.

बोनस नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी

किसानों ने धान पर मिलने वाले बोनस का मुद्दा भी उठाया. आंदोलनकारियों का कहना है कि जो किसान नियमित रूप से अपना कर्ज चुकाते हैं, उन्हें मिलने वाला बोनस भी अभी तक नहीं मिला है. किसानों का कहना है कि जब खेती की लागत बढ़ रही है और फसल का भाव पर्याप्त नहीं है, तब बोनस से उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है. किसानों ने सरकार से मांग की कि धान उत्पादक किसानों को उनका बकाया बोनस दिया जाए और धान की फसल के लिए ऐसा भाव मिले, जिससे खेती का खर्च निकालने के बाद किसानों को राहत मिल सके.

किसान नेता ने सरकार पर उठाए सवाल

किसान नेता प्रकाश पोहरे ने इस मार्च को किसानों के आक्रोश का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि फसल का भाव नहीं मिल रहा है, जबकि उत्पादन का खर्च लगातार बढ़ रहा है. उनके मुताबिक इस बार किसानों की स्थिति और भी खराब है और कई जगह सूखे जैसी स्थिति बन रही है. प्रकाश पोहरे ने धान के बोनस को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि धान पर बोनस देने की बात कही गई थी, लेकिन किसानों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की कर्ज से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए किए गए वादों पर भी अभी तक पूरी तरह अमल नहीं हुआ है.

किसानों ने सरकार से तत्काल फैसले की मांग की

किसानों का कहना है कि उनकी समस्याएं केवल धान के भाव तक सीमित नहीं हैं. सिंचाई के लिए पानी, तालाबों की मरम्मत, फसल का उचित दाम और बोनस जैसे कई मुद्दे लंबे समय से किसानों के सामने हैं. किसानों ने सरकार से इन समस्याओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की है. ट्रैक्टर मार्च के जरिए किसानों ने सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने की कोशिश की. बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ किसानों के सड़क पर उतरने से नागभीड़ में आंदोलन का बड़ा असर दिखाई दिया.

अब सरकार के फैसले पर नजर

नागभीड़ में हुए इस बड़े ट्रैक्टर मार्च के बाद अब किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर है. किसानों की मांग है कि धान का उचित भाव दिया जाए, बोनस का भुगतान किया जाए और सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. किसानों का कहना है कि अगर समय पर पानी और फसल का सही दाम मिले, तो खेती को बचाने में मदद मिल सकती है. अब देखना होगा कि किसानों की इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या फैसला लिया जाता है. (विकास राजुरकर का इनपुट)

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