
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार पराली जलाने के मामलों को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है. सिरसा ने दावा किया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर दिल्ली की हवा की क्वालिटी पर भी पड़ रहा है.
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिरसा ने कहा कि भगवंत मान ने हाल ही में दावा किया था कि पंजाब में धान की कटाई शुरू नहीं हुई है, जबकि राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 77 प्रतिशत धान की कटाई पूरी हो चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पंजाब में पराली नहीं जलाई जा रही है तो आगजनी के मामलों और किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या इतनी अधिक कैसे हो गई?
मनजिंदर सिंह सिरसा ने पराली जलाने के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2 नवंबर को पंजाब में पराली जलाने की केवल 92 घटनाओं की जानकारी सामने आई थी, जबकि इसके बाद आंकड़ा तेजी से बढ़ा. उन्होंने दावा किया कि 3 नवंबर को पंजाब में 584 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो इस सीजन में अब तक एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
सिरसा के मुताबिक, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में अब तक राज्य में पराली जलाने की 2,196 घटनाएं दर्ज की गई हैं और 494 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि पिछले साल 4 नवंबर को 292 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं, जबकि इस बार आंकड़ा काफी अधिक है.
पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए सिरसा ने आरोप लगाया कि पराली जलाने के मामले में किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. उन्होंने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कामकाज पर भी सवाल उठाए.
सिरसा ने कहा कि अगर सरकार का दावा है कि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी आई है, तो फिर आगजनी के इतने मामले और सैकड़ों मुकदमे कैसे दर्ज हुए? उन्होंने बठिंडा को दुनिया का सबसे धूल भरा शहर बताए जाने का भी जिक्र किया.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दावा किया कि 30 अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 60 के आसपास था, जो चार दिनों के भीतर बढ़कर करीब 350 तक पहुंच गया. उन्होंने प्रदूषण में अचानक आई इस बढ़ोतरी के लिए पंजाब में पराली जलाने और वहां की सरकार के खराब प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया.
सिरसा ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी हवाओं के कारण पंजाब से उठने वाला धुआं दिल्ली की ओर आ रहा है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे अगर स्थानीय निर्माण गतिविधियां, उद्योग या वाहनों की आवाजाही जिम्मेदार नहीं हैं, तो अचानक AQI में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई?
सिरसा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने में विफल रही है. उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हैप्पी सीडर और बेलर जैसी मशीनों की खरीद के लिए 5,000 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन पंजाब सरकार किसानों तक इन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर सकी.
उन्होंने यह भी बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 4 नवंबर को पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण में कथित नाकामी को लेकर पंजाब के कई जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तलब किया था.
दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लागू वाहन प्रतिबंधों को लेकर सिरसा ने NCR के लोगों से माफी भी मांगी. उन्होंने कहा कि BS-VI मानक से नीचे के वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर प्रतिबंध से आसपास के इलाकों के लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन यह कदम दिल्ली के बच्चों और आम लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर उठाया गया है.
सिरसा ने कहा, "NCR के लोगों से मैं माफी मांगता हूं. आपको परेशानी हो रही है, आपकी गाड़ियां बॉर्डर पर नहीं आ पा रही हैं, लेकिन आप दिल्ली के बच्चों की सेहत के बारे में सोचिए. हम इसी वजह से ऐसे कदम उठा रहे हैं."
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में 220 दिन अपेक्षाकृत साफ हवा दर्ज की गई है और सरकार प्रदूषण कम करने के लिए लगातार कदम उठा रही है. साथ ही उन्होंने पड़ोसी राज्यों के लोगों से वाहन प्रतिबंधों में सहयोग करने की अपील की.
मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकारों पर प्रदूषण के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने का खामियाजा दिल्ली के लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
फिलहाल, सिरसा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.