
महाराष्ट्र में सूखे को लेकर कांग्रेस ने राज्य की महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची तैयार करने में राजनीतिक भेदभाव किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, जबकि विपक्षी दलों के विधायकों के क्षेत्रों को राहत सूची से बाहर रखा गया. कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार की ओर से जारी सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहली सूची में 33 में से 28 राज्य कैबिनेट के मंत्रियों की तहसीलें शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या सूखे का आकलन किसानों की स्थिति के आधार पर किया गया है या राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर? कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों में किसान भीषण सूखे का सामना कर रहे हैं, लेकिन वहां स्थिति का जायजा लेने के लिए सरकार के मंत्री नहीं पहुंचे. उन्होंने कहा कि राहत और सहायता देने के मामले में राजनीतिक विचारों को अलग रखा जाना चाहिए.
कांग्रेस नेता ने चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तालुका का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि इलाके में गंभीर सूखे की स्थिति है, इसके बावजूद इसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने सरकार से ब्रह्मपुरी को भी सूची में शामिल करने और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की.
वडेट्टीवार ने कहा कि किसानों को राहत देने के मामले में सरकार को राजनीतिक आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर सरकार से सवाल करेगी.
महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी को देखते हुए राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है. यह राज्य के करीब 74 फीसदी तालुके हैं. सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए फसल लोन के पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत और बिजली बिलों में राहत समेत कई उपायों की घोषणा की है.
बता दें कि राज्य सरकार दीपावली से पहले किसानों को आर्थिक मदद पहुंचाने की कोशिश में है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने किसानों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है. वहीं, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि इसे लेकर राज्य के 11 विभागों की कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. कमर्चारियों को गैर-जरूरी छुट्टी करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. (पीटीआई)