
कर्नाटक में गन्ने के भाव को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. हुबली में बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादकों और किसानों ने उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी किसानों ने रानी चेन्नम्मा सर्कल से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी के घर और कार्यालय की ओर मार्च किया. बाद में किसानों ने उनके आवास का घेराव किया.
प्रदर्शन को देखते हुए हुबली के मयूर एस्टेट स्थित केंद्रीय मंत्री के घर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पुलिस बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की और अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई. हुबली-धारवाड़ के पुलिस कमिश्नर भूषण ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया.
इस आंदोलन में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. इसके अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से भी गन्ना उत्पादकों के आंदोलन में शामिल होने की बात कही गई है.
किसानों की प्रमुख मांग है कि गन्ने का ऐसा लाभकारी और निश्चित मूल्य तय किया जाए, जिससे बढ़ती उत्पादन लागत के बीच उन्हें उचित आमदनी मिल सके. इसके साथ ही आंदोलनकारी किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी उठा रहे हैं.
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि गन्ने के मौजूदा भाव में खेती की लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसी मांग को लेकर किसानों ने केंद्रीय मंत्री के घर और कार्यालय तक मार्च निकाला.
किसानों के प्रदर्शन और उनकी मांगों के बीच केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने किसान नेताओं को बातचीत का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने किसानों से सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय दिल्ली आकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने की अपील की.
जोशी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि किसान प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर किसी भी समय दिल्ली आ सकते हैं. केंद्र सरकार उनसे बातचीत करने और उनकी समस्याएं सुनने के लिए तैयार है.
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, किसान नेताओं ने फरवरी 2026 में उनसे मुलाकात कर गन्ने का FRP बढ़ाने की मांग रखी थी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य में समय-समय पर बढ़ोतरी की जाती रही है.
जोशी का कहना है कि किसान नेताओं के साथ पहले भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और आगे भी बातचीत का रास्ता खुला है. उन्होंने किसानों से आंदोलन के बजाय बातचीत के जरिए अपनी मांगों का समाधान निकालने की अपील की.
फिलहाल किसान संगठन गन्ने का लाभकारी मूल्य तय करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग पर जोर दे रहे हैं. किसानों के प्रदर्शन के चलते गन्ने के भाव का मुद्दा एक बार फिर कर्नाटक में गरमा गया है.