रबी अभियान पर जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केंद्र सरकार गांव-गांव जाकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के फायदे गिनवाएगी, क्योंकि इससे भारतीय कृषि क्षेत्र को फायदा मिलेगा. FTA के बाद भारतीय किसान कई देशों में जीरो ड्यूटी पर अपने उत्पाद बेच सकते हैं. लेकिन, उस देश के लिए तय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ेगा. एफटीए को लेकर किसानों के बीच अच्छा परसेप्शन बनाने का यह काम रबी सीजन के लिए होने वाले खेत बचाओ अभियान के दौरान होगा. यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवम्बर तक चलाया जाएगा. कई किसान संगठन एफटीए को भारतीय कृषि और किसानों के लिए खतरा बता रहे हैं, ऐसे में केंद्रीय कृषि मंत्रालय का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है. कृषि मंत्री नई दिल्ली में मंगलवार को रबी अभियान 2026 को लेकर राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.
केंद्रीय मंत्री ने खाद के इस्तेमाल पर बात करते हुए कहा कि किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी. उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में कुछ प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में संतुलित उर्वरक उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था. इस प्रयोग में उर्वरक की खपत 27 प्रतिशत कम हुई और करीब 1,400 करोड़ रुपये की बचत हुई. अब इसी मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है. अभियान में आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, आत्मा की टीमें और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों तक पहुंचेंगे.
किसानों को फसल चयन, मिट्टी, पानी, बीज और किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी. राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि मौसम की चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद किसानों को जरूरी खाद, बीज और अन्य कृषि संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की भी बात कही.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रबी अभियान की तैयारी के लिए केंद्र और राज्यों के बीच लगातार संवाद हुआ है. सम्मेलन से पहले राज्यों के कृषि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने करीब 10 घंटे तक अलग-अलग कृषि योजनाओं, फसल उत्पादन और किसानों की जरूरतों की समीक्षा की. इसके बाद कृषि मंत्रियों के साथ राज्यों की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर चर्चा की गई.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने अप्रैल से ही आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी थीं. एक समय देश में बारिश की कमी 14 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो हाल की बारिश के बाद घटकर करीब 12 प्रतिशत रह गई है.
उन्होंने कहा कि कृषि मानकों के अनुसार, 19 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी को गंभीर स्थिति माना जाता है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है. नुकसान का विस्तृत आकलन कराया जा रहा है.
उर्वरकों की उपलब्धता पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों पर इसका अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने करीब 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है.
देश में फिलहाल 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है. पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में इसी अवधि में करीब 122 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक था. केंद्र सरकार राज्यों के साथ लगातार समन्वय कर खाद की सप्लाई सुनिश्चित कर रही है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 2025-26 में 362.60 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहा. वर्ष 2026-27 के लिए देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 मिलियन टन तय किया गया है. इसमें रबी सीजन का लक्ष्य 177.72 मिलियन टन रखा गया है. उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता, मिट्टी की नमी और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसल उत्पादन की रणनीति तैयार की जा रही है.
दलहन और तिलहन किसानों को बाजार भाव में गिरावट से बचाने के लिए केंद्र ने खरीद व्यवस्था में बदलाव की बात कही है. शिवराज सिंह चौहान के अनुसार यदि इन फसलों का बाजार भाव MSP से नीचे जाता है और राज्यों की ओर से खरीद में देरी होती है, तो NAFED और NCCF सीधे मंडियों में खरीद शुरू कर सकेंगी. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से बचाना है. इसके बाद राज्य की एजेंसियां भी खरीद प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगी.
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित राज्यों की स्थिति का जायजा लेने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें भेजी जाएंगी. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत प्रभावित राज्यों से मिले अनुरोधों के आधार पर फील्ड स्तर पर नुकसान का आकलन किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि SDRF के तहत तत्काल राहत के लिए राज्यों को उपलब्ध राशि में केंद्र का 75 प्रतिशत हिस्सा होता है, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य देते हैं. NDRF के तहत केंद्रीय टीम के आकलन के बाद अतिरिक्त सहायता पर निर्णय लिया जाएगा.
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसानों को दंडित करने के बजाय उनसे संवाद और सहयोग के जरिए समस्या का समाधान किया जाना चाहिए.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि 2019-20 में प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत बताई जाती थी, जो अब घटकर करीब 2.5 प्रतिशत रह गई है. उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक मशीनरी और उचित तकनीक उपलब्ध कराकर पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने की जरूरत है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि गन्ने में रेड रॉट और कपास में पिंक बॉलवर्म जैसी समस्याओं से निपटने के लिए आईसीएआर के वैज्ञानिक नई रोग-प्रतिरोधी किस्मों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने प्राकृतिक खेती के विस्तार और किसानों को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी चल रहे प्रयासों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य रबी सीजन में उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को खाद, बाजार, मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों के बीच आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है.
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