
पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों को लेकर किसान संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. किसान मजदूरी संघर्ष कमेटी और मानसा एक्शन कमेटी के आह्वान पर सोमवार को प्रदेशभर में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के आवासों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धरना देकर जनप्रतिनिधियों को 'लाहनती पत्र' यानी विरोध पत्र सौंपे.
अमृतसर में आयोजित प्रदर्शन में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और गुरबचन सिंह चब्बा भी शामिल हुए. दोनों नेताओं ने राज्य में नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को न्याय दिलाने की मांग दोहराई.
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने का काम कर रहे थे. नेताओं का आरोप है कि नशा कारोबार के खिलाफ उनकी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया गया.
गुरबचन सिंह चब्बा ने कहा कि जिस व्यक्ति पर नशे के कारोबार से जुड़े होने के आरोप थे और जिसके खिलाफ मामले दर्ज बताए जाते हैं, उसे दोबारा हथियार का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. चब्बा ने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार और संघर्ष कर रही समितियों को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब का शायद ही कोई परिवार ऐसा होगा जो नशे की समस्या से किसी न किसी रूप में प्रभावित न हुआ हो. उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों युवा नशे की वजह से अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं, लेकिन सरकारें इस समस्या के स्थायी समाधान में सफल नहीं हो पाई हैं.
पंधेर ने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट बन चुका है. इसे राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे को लेकर भी किसान नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए पंजाब आते हैं, जबकि राज्य के वास्तविक मुद्दों के समाधान को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं देती.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश के कई राज्यों और दर्जनों जिलों में नशे की समस्या मौजूद है, तो केवल पंजाब को ही इसके लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जाता है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के जरिए नशे की तस्करी होने और उसके नियंत्रण को लेकर भी सवाल खड़े किए.
किसान नेताओं ने कहा कि फिलहाल तीन घंटे का यह प्रदर्शन सांकेतिक था, लेकिन यदि सरकार ने नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं की और परविंदर सिंह झोटा को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस लड़ाई में एकजुट होकर भाग लें. नेताओं का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को नशे के संकट से बचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक संघर्ष जरूरी है.(अमित शर्मा का इनपुट)