नारायणगढ़ की दशहरा रैली में जुटेंगे अन्‍नदाता, मनोज जारंगे बोले- सिर्फ किसानों के मुद्दे उठाएंगे

नारायणगढ़ की दशहरा रैली में जुटेंगे अन्‍नदाता, मनोज जारंगे बोले- सिर्फ किसानों के मुद्दे उठाएंगे

महाराष्ट्र में सूखे, फसल बर्बादी और पानी की किल्लत से जूझ रहे किसानों का मुद्दा उठाएंगे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे. उन्‍होंने कहा कि नारायणगढ़ में मंगलवार को होने वाली दशहरा रैली में किसानों की समस्याओं और उनके अधिकारों पर बात होगी.

Manoj Jarange PatilManoj Jarange Patil
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 19, 2026,
  • Updated Oct 19, 2026, 7:37 PM IST

महाराष्ट्र में सूखे और फसलों को हुए नुकसान के बीच मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा है कि उनकी दशहरा रैली किसानों की समस्याओं पर केंद्रित रहेगी. उन्होंने सोमवार को जालना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मंगलवार को नारायणगढ़ में होने वाली रैली में किसानों की आर्थिक परेशानियों और कृषि संकट को प्रमुखता से उठाया जाएगा. जरांगे ने साफ किया कि रैली राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं बनेगी.

मनोज जरांगे ने कहा कि बड़े पैमाने पर फसलें खराब होने, आर्थिक नुकसान बढ़ने और पानी की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उन्होंने किसानों से आत्महत्या जैसा चरम कदम नहीं उठाने की अपील की. जरांगे ने कहा कि कृषि उपज का उचित भाव नहीं मिलना, कुओं का सूखना और चारे के साथ पीने के पानी की कमी किसानों की परेशानियां बढ़ा रही हैं.

₹5,000 की अंतरिम राहत राशि पर उठाए सवाल

जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अग्रिम सहायता देने की घोषणा की आलोचना की. उन्होंने इस राशि को किसानों की जरूरतों के मुकाबले अपर्याप्त बताते हुए इसे किसानों का अपमान करार दिया. जरांगे ने आरोप लगाया कि सहायता पाने के लिए किसानों को जटिल कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है.

महाराष्ट्र के 85 फीसदी से ज्यादा तालुका सूखा प्रभावित

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर को घोषणा की थी कि दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में शुरुआती राहत के तौर पर ₹5,000 सीधे जमा किए जाएंगे. यह घोषणा ऐसे समय में हुई, जब महाराष्ट्र के 85 फीसदी से अधिक तालुकाओं को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है. जरांगे ने आरोप लगाया कि परेशान किसानों को पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है, जबकि मंत्रियों के सरकारी आवासों की सजावट और मरम्मत पर बड़ी रकम खर्च की जा रही है.

जाति-धर्म से ऊपर किसान की पहचान पर जोर

मनोज जरांगे ने कहा कि किसान की पहली पहचान मिट्टी से जुड़ा व्यक्ति होने की है, चाहे उसकी जाति या धर्म कुछ भी हो. उन्होंने किसानों से एकजुट होकर संकट का सामना करने और सरकार से अपने अधिकारों तथा उचित सहायता के लिए मिलकर संघर्ष करने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसानों को इस मुश्किल दौर से निकालने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.

पैतृक गांव अंतरवाली सराटी के विकास की मांग

जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे की ओर से उनके पैतृक गांव अंतरवाली सराटी को गोद लेने की घोषणा का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि अगर इससे गांव का समग्र विकास होता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. 

जरांगे ने वडिगोद्री-अंतरवाली सराटी सड़क को चार लेन का बनाने, गांव में सीमेंट-कंक्रीट की आंतरिक सड़कें बनाने, पेवर ब्लॉक लगाने और स्कूलों, मंदिरों और मस्जिदों के आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण करने की मांग की. उन्होंने गांव की शराब की दुकान को स्थायी रूप से बंद करने की भी मांग रखी.

मराठा समुदाय से एकजुट रहने की अपील

मनोज जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें घेरने और अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि समुदाय का पहले समर्थन हासिल कर चुके कुछ लोग अब उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं. जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों से राजनीतिक तनाव के बीच धैर्य बनाए रखने और एकजुट रहने की अपील की. (पीटीआई)

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