
कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. राज्य के कई हिस्सों में खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने के साथ पशुओं के लिए चारे और लोगों के लिए पीने के पानी की कमी भी बढ़ रही है. हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में टैंकरों और निजी बोरवेल के जरिए पानी पहुंचाना पड़ रहा है. कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को कहा कि कुछ क्षेत्रों में हाल में बारिश जरूर हुई है, लेकिन इससे राज्य के बड़े हिस्से में सूखे का असर कम नहीं हुआ है. राज्य सरकार अपने स्तर पर राहत कार्य चला रही है और केंद्र से सूखा राहत राशि जारी करने की मांग भी कर रही है.
डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने बताया कि सूखे के कारण राज्य में खाद्यान्न उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचा है. उत्पादन में करीब 82 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है. इससे अनाज की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि उत्पादन पर सूखे की मार का असर किसानों की आजीविका के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर राहत के उपाय कर रही है.
सूखे का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन भी इससे प्रभावित हो रहा है. राज्य में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता घटने से पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. खेती और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के सामने अब फसल के नुकसान के साथ पशुओं के भरण-पोषण की चुनौती भी खड़ी हो गई है.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी की आपूर्ति टैंकरों और किराये पर लिए गए निजी बोरवेल के जरिए की जा रही है. जिला स्तर पर अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है.
जिलाधिकारियों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की निगरानी में राहत संबंधी काम किए जा रहे हैं. डिप्टी सीएम ने आशंका जताई कि अगर पानी के मौजूदा स्रोत भी सूख गए तो टैंकरों के जरिए आपूर्ति करना भी मुश्किल हो सकता है.
डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से सहायता मिलने का इंतजार किए बिना राहत कार्य जारी रखे हुए है. सूखे से प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद देने के लिए राज्य सरकार करीब 1,250 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.
इस राशि से किसानों को 2,500 रुपये प्रति किसान की सहायता दी जा रही है. सरकार का कहना है कि सूखे से प्रभावित लोगों की जरूरतों को देखते हुए राहत के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा, पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी धन उपलब्ध कराया गया है.
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और फसलों समेत अन्य नुकसान का आकलन केंद्र सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है. इसी आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के नियमों के तहत केंद्र से आर्थिक सहायता मांगी जाती है. राज्य सरकार अब सूखा राहत के लिए तीसरा ज्ञापन तैयार कर रही है. इसे अगले दो दिनों में तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपे जाने की उम्मीद है.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से आवश्यक धनराशि मिलने पर सूखे से प्रभावित किसानों और आम लोगों को राहत देने में मदद मिलेगी. उन्होंने केंद्र से जल्द सहायता जारी करने का आग्रह किया. राज्य सरकार के सामने फिलहाल फसल नुकसान, पशुओं के लिए चारे की कमी और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसी कई चुनौतियां हैं. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने स्तर पर सूखा राहत और पेयजल आपूर्ति के उपाय जारी रखेगी. मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन को प्रभावित इलाकों में जरूरत के अनुसार कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. (पीटीआई)