
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में शुक्रवार को किसानों ने अर्धनग्न होकर जिला कलेक्टरेट के सामने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही हैं. कृषि से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नेता अय्यकन्नू ने किया. वह नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स लिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष हैं. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चूहा खाने का प्रतीकात्मक नाटक किया.
किसानों ने कहा कि वे यह विरोध उनकी बदतर होती हालत को दिखाने के लिए कर रहे हैं. उहोंने आरापे लगाया कि सरकार कृषि उपज (फसलों) के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में विफल रही है. तमिलनाडु में सहकारी बैंकों से लिए गए कृषि लोन भी अब तक माफ नहीं किए गए हैं. इसके अलावा किसानों ने कावेरी नदी पर चेक डैम निर्माण को लेकर भी सरकार की आलोचना की. किसानों ने कहा कि पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से खेती पर असर पड़ रहा है.
किसानों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकारें चुनाव के समय किसानों से बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन चुनाव के बाद उन वादों को लागू नहीं किया जाता. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार तत्काल किसानों की समस्याओं पर ध्यान दे और जरूरी नीतिगत फैसले ले. इससे पहले भी तिरुचिरापल्ली में किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था.
किसानों का आरोप है कि उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. इसी क्रम में हाल ही में कुछ किसानों ने अत्यंत कठोर प्रतीकात्मक विरोध करते हुए मानव मल का सेवन किया था. किसानों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए किए गए.
किसानों ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान कृषि और किसानों से जुड़े कई वादे किए गए थे. चुनाव के समय लगभग 56 घोषणाएं की गई थीं, जिनमें संपूर्ण कृषि लोन माफी, फसलों के लिए लाभकारी मूल्य, अतिरिक्त धान खरीद केंद्र खोलना और फसल बीमा का पूरा मुआवजा देना शामिल था.
किसानों ने कहा कि इन घोषणाओं में से ज्यादातर पर अब तक अमल नहीं हुआ है. प्रदर्शन में शामिल किसानों की मांग है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करे और कृषि से जुड़े वादों को लागू करे. किसानों ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे. (एएनआई)