
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने अमेरिका से आने वाले अमेरिकी सामानों पर BJP सरकार के शून्य-प्रतिशत आयात शुल्क के फैसले की निंदा की है. आरोप लगाया कि यह फैसला दबाव में लिया गया है. SKM का आरोप है कि यह फैसला भारत के कृषि हितों का पूरी तरह से आत्मसमर्पण है और यह भारतीय बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के बिना किसी रोक-टोक के आने के लिए खोल देगा.
SKM ने अपने बयान में, 15 अगस्त, 2025 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को याद किया, जिसमें दावा किया गया था कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं. आज, वही प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फरमानों के आगे झुक गए हैं, और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजारों में मुफ्त प्रवेश की अनुमति देने के लिए शून्य आयात शुल्क स्वीकार कर लिया है.
SKM के अनुसार, यह व्यापार समझौता भारतीय बाजारों को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों से भर देगा, जिससे देश भर के किसान परिवार तबाह हो जाएंगे. 2024 के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में केवल 20 लाख किसान हैं, जबकि 2015 की कृषि जनगणना के अनुसार भारत में 1465 लाख ऑपरेशनल लैंडहोल्डिंग थी. यानी इतने बड़े जोत पर खेती हो रही थी. भारत के लगभग 48 परसेंट कार्यबल और 65 परसेंट आबादी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है.
एसकेएम ने कहा, किसान इस "ऐतिहासिक विश्वासघात" के लिए पीएम मोदी को कभी माफ नहीं करेंगे.
अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस के अनुसार, यह समझौता अमेरिका को भारत के विशाल बाजार में अधिक कृषि उत्पादों का निर्यात करने, कीमतें बढ़ाने, ग्रामीण अमेरिकी क्षेत्रों में कमाई बढ़ाने और भारत के साथ अमेरिकी कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेगा, जो 1.3 अरब डॉलर है. इस पर एसकेएम ने कहा कि एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं, वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को नष्ट करने की कीमत पर आत्मसमर्पण शर्मनाक है.
SKM ने देश भर के किसानों और लोगों से 4 से 11 फरवरी तक मोदी सरकार के खिलाफ गांव-गांव अभियान चलाने, सार्वजनिक सभाओं में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप दोनों के पुतले जलाने और घोषित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए 12 फरवरी को तहसील और शहरी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है.