India-US Trade Deal: 'भाजपा ने फिर किया किसानों पर वार', इंडिया-यूएस ट्रेड एग्रीमेंट पर भड़के विपक्षी दल

India-US Trade Deal: 'भाजपा ने फिर किया किसानों पर वार', इंडिया-यूएस ट्रेड एग्रीमेंट पर भड़के विपक्षी दल

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासत गरमा गई है. विपक्ष इसे किसानों के लिए खतरा बता रहा है, जबकि सरकार इसे बड़े अवसर के रूप में पेश कर रही है. अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस नेताओं ने इस पर तीखी हमला बोलते हुए किसान विरोधी कदम बताया है.

India Us Trade Deal PM Narendra Modi and President TrumpIndia Us Trade Deal PM Narendra Modi and President Trump
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 03, 2026,
  • Updated Feb 03, 2026, 12:57 PM IST

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. अमेरिका के साथ हुए इस समझौते को जहां सरकार ऐतिहासिक और किसानों-उद्योग के लिए अवसर बताने में जुटी है, वहीं विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर किसानों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ करार दिया है. विपक्षी दलों के तीखे बयानों के बाद यह डील राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अख‍िलेश यादव ने इस समझौते पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि भारतीय बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलना देश के लगभग 70 प्रतिशत किसानों के साथ विश्वासघात है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो सरकार आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की बात करती है, वही सरकार अब विदेशी कृषि उत्पादों के सामने देश के किसानों को असहाय छोड़ रही है.

'छोटे-मझोले किसानों को होगा नुकसान'

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि आखिर किस दबाव में सरकार ने यह फैसला लिया है? इसका सीधा नुकसान छोटे और मझोले किसानों को झेलना पड़ेगा. अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियों से केवल किसानों की आमदनी पर ही नहीं, बल्कि देश के निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग पर भी असर पड़ेगा.

उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों के आने से मुनाफाखोरी बढ़ेगी, नए बिचौलिये पैदा होंगे और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आएगी. उन्होंने दावा किया कि अंततः किसान खेती से हतोत्साहित होकर अपनी जमीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को बेचने के लिए मजबूर होंगे.

सपा सांसद ने विदेश नीत‍ि पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील और विदेश नीति पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि सरकार की अस्पष्ट विदेश नीति के कारण व्यापारी और निर्यातक असमंजस में हैं. कई कारोबारी बैंक लोन लेकर काम कर रहे थे और अब वे ईएमआई चुकाने की स्थिति में नहीं हैं. राजीव राय ने कहा कि अगर विदेश नीति में स्पष्ट दिशा नहीं होगी तो उसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ेगा.

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि रूस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद मित्र रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में सरकार की नीति विरोधाभासी नजर आ रही है. एक तरफ सरकार वैश्विक मंच पर भूमिका निभाने की बात करती है, दूसरी तरफ ऊर्जा और व्यापार के मोर्चे पर दबाव में फैसले लेती दिखती है.

शून्‍य प्रतिशत पर भारत आएंगे अमेरिकी कृषि‍ उत्‍पाद: कांग्रेस

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस समझौते को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के साथ घातक विश्वासघात किया गया है. सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पाद अब शून्य या बेहद कम शुल्क पर भारतीय बाजार में आ सकेंगे, जिससे देश के किसान और खेत मजदूर सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. सुरजेवाला ने इसे भारत की संप्रभुता से भी जुड़ा मुद्दा बताया और पूछा कि क्या यह वास्तव में राष्ट्रीय हित में है.

प्र‍ियंका चतुर्वेदी ने कही ये बात

शिवसेना यूबीटी नेता प्र‍ियंका चतुर्वेदी ने भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पोस्ट से जो शर्तें सामने आ रही हैं, वे भारत के लिए किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं दिखतीं. उन्होंने कहा कि 25 प्रतिशत से 18 प्रतिशत टैरिफ घटने को बड़ी उपलब्धि बताना भ्रामक है, जब बदले में भारत अपने बाजार अमेरिकी कृषि, ऊर्जा और अन्य उत्पादों के लिए लगभग पूरी तरह खोल रहा है.

प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि रूस और ईरान जैसे विकल्पों से दूरी बनाकर अमेरिकी ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाना और सैकड़ों अरब डॉलर की खरीद का दबाव स्वीकार करना किसके हित में है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पूरी जानकारी सार्वजनिक किए ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा नुकसान किसानों, उपभोक्ताओं और देश की रणनीतिक स्वायत्तता को हो सकता है.

केंद्रीय मंत्री बोले- भारतीय किसानों-उद्योगों को होगा फायदा

वहीं, सरकार की ओर से इस समझौते का बचाव किया जा रहा है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से घरेलू किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर खुलेंगे. यह समझौता मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस डील के जरिए अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटेगा, जिससे निर्यात को राहत मिलेगी. वहीं, विपक्ष का तर्क है कि अमेरिकी दावों और बयानों से साफ है कि इस समझौते का बड़ा फायदा अमेरिका को होगा. खासकर इससे उसके कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को फायदा होगा. (एजेंसी)

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