
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार 28 जनवरी को एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया. उनके एक करीबी सहयोगी ने इस बात की पुष्टि की है कि जिस एयरक्राफ्ट में वे सफर कर रहे थे, वह महाराष्ट्र के बारामती में लैंड करने की कोशिश में क्रैश हो गया. वहीं डीजीसीए ने भी अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि जो प्लेन क्रैश हुआ है उसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि विमान में मंत्री समेत छह लोग सवार थे और वो मुंबई से बारामती जा रहे थे. पवार का खेती-किसानी से गहरा नाता रहा है. उन्होंने कुछ समय पहले कर्ज माफी को लेकर एक बयान दिया था, जिससे किसान नाराज हो गए थे. उन्होंने कहा था कि सरकार कितनी बार किसानों के कर्ज माफ करेगी? फिर उस पर उन्होंने माफी भी मांगी थी.
नवंबर 2025 में अजित पवार जिनके पास वित्त मंत्रालय भी था, उन्होंने किसानों की कर्ज माफी पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार कितनी बार किसानों के कर्ज माफ करेगी. साथ ही उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि क्या इस तरह की वित्तीय रियायतें देना सही है? पवार ने किसानों से वित्तीय अनुशासन अपनाने और अपने संसाधनों का अधिक समझदारी से प्रबंधन करने की अपील की थी. पवार ने कहा था, 'हम नए साल में कृषि कर्ज माफी पर निर्णय लेंगे क्योंकि वर्तमान वित्तीय बोझ महत्वपूर्ण है. चूंकि यह हमारे घोषणापत्र का हिस्सा है, हम इस बार इसे लागू करेंगे. लेकिन यह एक आदत नहीं बन सकती. किसानों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और समय पर कर्ज चुकाना सुनिश्चित करना चाहिए.'
पवार ने कहा कि जब आपको जीरो प्रतिशत ब्याज पर कृषि लोन मिलता है तो नियमित तौर पर उसका भुगतान की आदत भी होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि सरकार किनी बार किसानों का कर्ज माफ करेगी. उन्होंने किसानों से पूछा,'किसान हमेशा कर्ज माफी की मांग क्यों करते हैं. पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के समय में और फिर देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की राज्य सरकारों ने कर्ज माफ किए थे. उन्होंने आगे कहा कि लोन माफी ऐसी चीज नहीं है जो बार-बार की जानी चाहिए.'
जब इस बयान पर जब बवाल हुआ तो उन्होंने माफी मांगी और कहा कि महायुति सरकार किसानों की कर्जमाफी के अपने वादे से पीछे नहीं हटी है. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की कर्ज माफी को लेकर जल्द सरकार कदम उठाएगी. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्तारूढ़ गठबंधन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि महायुति की सरकार महाराष्ट्र के किसानों की कर्जमाफी में देरी कर रही है. साथ ही राज्य के किसानों की दुर्दशा के प्रति चिंता न दिखाने का भी आरोप लगाया था.
पवार के बयान के बाद विपक्ष उन पर हमलावर हुआ और उन पर कई तरह के आरोप लगे. इस पर पवार ने जवाब दिया और कहा, 'हम किसानों की कर्जमाफी के अपने वादे से पीछे नहीं हटे हैं. हम महायुति के घोषणापत्र में दिए गए आश्वासनों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. इसके लिए एक समिति का गठन किया गया है, क्योंकि ऐसे फैसलों के लिए वित्तीय पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार करने की जरूरत होती है.' पवार ने जोर देकर इस बात को कहा कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कभी नहीं कहा कि वह किसानों की कर्जमाफी नहीं करेगी. उनका कहना था कि सही समय आने पर समिति विस्तृत जानकारी देगी.
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