भारत अमेरिका ट्रेड डीलट्रेड डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि उनका देश भारत पर 'आपसी' (रेसिप्रोकल) टैरिफ को 25 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट करेगा. ट्रंप की इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी पुष्टि की. पीएम मोदी ने कहा कि एक बडी ट्रेड डील हुई है और ये हमारी कूटनीति की एक बड़ी जीत है. उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि धैर्य का फल हमेशा मिलता है. दोनों राष्ट्राध्यक्षों की घोषणाओं से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिली है और इससे संकेत मिलता है कि एक साल के गंभीर तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संबंध सुधर रहे हैं.
अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने भी पुष्टि की कि पिछले अगस्त में भारत पर लगाया गया 25% पेनल्टी टैरिफ अब हटा दिया गया है. पेनल्टी टैरिफ ने कुल टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया था, जो ब्राजील के साथ दुनिया के किसी भी देश पर सबसे ज्यादा था.
हालांकि इस ट्रेड डील के बाद कुछ बड़े प्रश्न खड़े हुए हैं जो कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं. भारत शुरू से कहता रहा है कि कृषि क्षेत्र में वह किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी भी यह बात दोहरा चुके हैं और किसानों के हितों की रक्षा का वादा कर चुके हैं. लेकिन इस ट्रेड डील के बाद सवाल उठा है कि क्या भारत का कृषि क्षेत्र अमेरिकी आयात के लिए खुल गया है. यह प्रश्न इसलिए उठ रहा है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी कृषि मंत्री का बयान बताता है कि भारत के बाजार अमेरिकी कृषि प्रोडक्ट के लिए खुल गए हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के प्रति दोस्ती और सम्मान के कारण और उनके अनुरोध के अनुसार, तुरंत प्रभाव से, हम संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका कम आपसी टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाएगा, इसे 25% से घटाकर 18% कर देगा." ट्रंप ने एक लंबी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत कई उपायों पर सहमत हुआ है, जिसमें रूसी तेल आयात बंद करना, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को "शून्य" करना, और 500 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान, जिसमें ऊर्जा भी शामिल है, खरीदना शामिल है.
दूसरी ओर, अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रॉलिंस ने एक पोस्ट में लिखा, हमारे अमेरिकी किसानों के लिए एक बार फिर काम करने के लिए @POTUS (अमेरिकी राष्ट्रपति) आपका धन्यवाद. नए US-इंडिया डील से भारत के बड़े बाजार में ज्यादा अमेरिकी खेती के प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट होंगे, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा.
Thank you @POTUS for ONCE AGAIN delivering for our American farmers.
— Secretary Brooke Rollins (@SecRollins) February 2, 2026
New US-India deal will export more American farm products to India's massive market, lifting prices, and pumping cash into rural America.
In 2024, America’s agricultural trade deficit with India was $1.3… https://t.co/Z04eNDfXjD
रॉलिंस ने कहा, 2024 में, भारत के साथ अमेरिका का एग्रीकल्चर ट्रेड डेफिसिट 1.3 अरब डॉलर था. भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी खेती के प्रोडक्ट्स के लिए एक जरूरी बाजार है और आज का यह डील इस डेफिसिट को कम करने में बहुत मदद करेगा. खेती के लिए दर्जनों डील्स के अलावा यह अमेरिका फर्स्ट की एक और जीत है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना यह दावा कर दिया कि भारत "अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को घटाकर जीरो कर देगा". लेकिन नई दिल्ली ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है, और न ही यह बताया गया है कि किन चीजों पर टैरिफ जीरो किया जाएगा. इसके अलावा, मार्केट एक्सेस का जहां तक सवाल है, खासकर सोयाबीन और डेयरी जैसे एग्रीकल्चर सेक्टर में, जिन्हें भारत खोलने में हिचकिचा रहा है, उसका जवाब अभी भी नहीं मिला है.
जनवरी में, अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने कहा था कि एक डील महीनों पहले तैयार हो गई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका क्योंकि उन्होंने दावा किया कि PM मोदी ने इसे पक्का करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया. विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज कर दिया था.
एक तरफ ट्रंप का दावा कि कुछ चीजों पर अमेरिका के खिलाफ टैरिफ को जीरो किया गया है और दूसरी ओर अमेरिकी कृषि मंत्री रॉलिंस का कहना कि नए US-इंडिया डील से भारत के बड़े बाजार में ज्यादा अमेरिकी खेती के प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट होंगे, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा.
इन दोनों के सामने भारत का इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना कृषि क्षेत्र को लेकर कई सवाल उठाता है. विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सरकार से सवाल पूछा है और कृषि क्षेत्र के टैरिफ पर स्पष्टीकरण मांगा है. सरकार की ओर से जब तक कोई जवाब नहीं आता है, तब तक टैरिफ और कृषि क्षेत्र के असमंजस बरकरार रहेंगे.
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