
महाराष्ट्र के संभाजी नगर में किसानों को खाद और यूरिया उपलब्ध कराने के लिए लागू की गई ऑनलाइन फर्टिलाइजर बुकिंग व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को शहर के कैंब्रिज चौक पर जोरदार आंदोलन किया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जालना रोड पर चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इस आंदोलन का नेतृत्व कांग्रेस सांसद कल्याण काले ने किया.
करीब 45 मिनट तक चले इस प्रदर्शन के कारण जालना रोड पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. आंदोलनकारियों का आरोप था कि सरकार द्वारा खाद खरीद के लिए अनिवार्य किए गए ऑनलाइन ऐप के कारण किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
इस अवसर पर सांसद कल्याण काले ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था किसानों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई है. उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल इस ऐप आधारित प्रणाली को बंद कर पहले की तरह खाद की सामान्य बिक्री व्यवस्था बहाल करे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो कांग्रेस आंदोलन को और व्यापक करेगी.
आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. बाद में पुलिस ने सांसद कल्याण काले समेत कई कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. हालांकि कुछ समय बाद यातायात को सुचारु कर दिया गया. कांग्रेस का कहना है कि किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और खाद संकट के मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा.
कालाबाजारी रोकने और खेती-बाड़ी से जुड़ी सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के लिए, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने महाराष्ट्र में फर्टिलाइजर बुकिंग ऐप (FSAS) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसमें छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर जैसे इलाके शामिल हैं.
इस ऐप में सुविधा दी गई है कि आप 20 km के दायरे में मौजूद अधिकृत रिटेल दुकानों को देख सकते हैं और उनके पास स्टॉक की मौजूदा स्थिति (रियल-टाइम उपलब्धता) की जांच कर सकते हैं. साथ ही आप दुकान पर जाए बिना ही जरूरी खाद को पहले से ऑनलाइन बुक कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपने आधार कार्ड और किसान ID के साथ-साथ अपनी जमीन और फसलों की जानकारी देनी होगी.
हालांकि डिजिटल सिस्टम को अधिक पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया है, लेकिन ऐप-आधारित वितरण में शुरू में कुछ लॉजिस्टिकल और जमीनी स्तर की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस समस्या की जानकारी दी है जिस पर किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.(इसरार चिस्ती का इनपुट)