PM मोदी को CM शिवकुमार की चिट्ठी, कर्नाटक के लिए 3,705 करोड़ रुपये की सूखा राहत मांगी

PM मोदी को CM शिवकुमार की चिट्ठी, कर्नाटक के लिए 3,705 करोड़ रुपये की सूखा राहत मांगी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के सूखे, गन्ना किसानों के आंदोलन और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. शिवकुमार ने बताया कि राज्य के 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और यह संख्या 200 से अधिक होने की आशंका है. राज्य ने सूखा राहत के लिए केंद्र से 3,705.30 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है.

CM शिवकुमारCM शिवकुमार
सगय राज
  • बेंगलुरु,
  • Nov 05, 2026,
  • Updated Nov 05, 2026, 1:35 PM IST

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. इन मुद्दों में सूखे से राहत, गन्ना किसानों का चल रहा आंदोलन और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) का विकास शामिल हैं.

शिवकुमार ने केंद्र से सूखे से राहत के लिए फंड जारी करने की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया है. उन्होंने बताया कि राज्य के 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और यह संख्या 200 के पार जाने की उम्मीद है. राज्य ने सूखे से राहत के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है.

गन्ना किसानों के संकट पर पीएम मोदी की चिट्ठी

गन्ना संकट को लेकर, शिवकुमार ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में वृद्धि, 'उचित और लाभकारी मूल्य' (FRP) के लिए आधार रिकवरी दर को वापस 9.5% करने, गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों की समीक्षा करने और घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग मूल्य तय करने की मांग की है.

शिवकुमार ने चिट्टी में लिखा, मैं आपका ध्यान हमारी एक प्रमुख परियोजना, 'मेकेदातु परियोजना' की ओर दिलाना चाहता हूं, जो दक्षिणी कर्नाटक की पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इससे हमें अतिरिक्त पानी के समय उसे जमा करने और बाद में पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

साथ ही, यह भी सुनिश्चित होगा कि तमिलनाडु को पानी का उसका उचित हिस्सा मिलता रहे. हमारा दृढ़ विश्वास है कि दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच आपसी समझ और सहयोग से इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है. इसी तरह, कलसा-बंदूरी, अपर भद्रा, अपर कृष्णा और येत्तिनाहोले जैसी परियोजनाएं लाखों लोगों, खासकर उत्तरी कर्नाटक के लोगों की लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों से जुड़ी हैं. वहां कई पीढ़ियों से लोग अपने घरों के लिए पीने के पानी और खेतों की सिंचाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं. इन परियोजनाओं के लिए जरूरी मंजूरी और अनुमतियां मिलने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए. राज्य में सिंचाई कार्यों के लिए हमारे पास बड़े लक्ष्य हैं और हम जल शक्ति मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हैं.

हमने PMKSY और AIBP के तहत केंद्र के सामने कई प्रस्ताव रखे हैं और हमें उनकी मंजूरी का इंतजार है. उन्होंने केंद्र के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं, जिसके तहत गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को 2026-27 की खरीद टेंडर (प्रोक्योरमेंट टेंडर) से बाहर रखा गया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे चीनी मिलों की कमाई और किसानों को भुगतान करने की उनकी क्षमता पर असर पड़ सकता है.

सिंचाई प्रोजेक्ट की मंजूरी की मांग

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मिलने का अपना अनुरोध फिर दोहराया है, ताकि कर्नाटक के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सूखे से राहत और गन्ना किसानों की मांगों पर चर्चा की जा सके.

एक अलग अपील में, शिवकुमार ने बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है. साथ ही, उन्होंने मेकेदातू, कलासा-बंदूरी, अपर भद्रा और अपर कृष्णा जैसी सिंचाई परियोजनाओं के लिए मंजूरियों में तेजी लाने का भी आग्रह किया है.

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