
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी खेती के लिए मिली 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी है. हालांकि अब उन्होंने यह पूरी सब्सिडी वापस कर दी है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में इसकी आधिकारिक जानकारी दी. यह मामला सामने आने के बाद काफी चर्चा में रहा कि आखिर कृषि मंत्रालय में जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री को उसी मंत्रालय के तहत चल रही योजना का लाभ कैसे मिला.
हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी. यह सब्सिडी केंद्र सरकार की बागवानी से जुड़ी एक योजना के तहत दी गई थी. रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए और पूरे मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई.
इसके बाद संसद में भी यह मुद्दा पहुंचा. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगा.
लोकसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि भागीरथ चौधरी ने योजना के तहत मिली पूरी सब्सिडी संबंधित बैंक को वापस कर दी है. उन्होंने यह भी बताया कि बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह यह राशि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को लौटा दे.
सरकार के अनुसार अब यह सब्सिडी सरकार के पास वापस चली जाएगी और इस मामले में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
भागीरथ चौधरी को यह आर्थिक सहायता मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत मिली थी. यह योजना देश में बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जाती है. इसका संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) करता है, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है.
इस योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और व्यावसायिक स्तर पर बागवानी करने के लिए आर्थिक सहायता देना है.
MIDH योजना के तहत किसानों को शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और कई प्रकार के फूलों की खेती के लिए सहायता दी जाती है. पात्र किसानों को परियोजना की लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इसका मकसद संरक्षित खेती (Protected Cultivation) और उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी को बढ़ावा देना है.
जानकारी के अनुसार भागीरथ चौधरी का खेती प्रोजेक्ट लगभग 16,592 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया गया था, जिसके लिए उन्हें यह सब्सिडी स्वीकृत हुई थी.
लोकसभा में सरकार ने यह भी जानकारी दी कि भागीरथ चौधरी के अलावा राजस्थान के जालोर से भाजपा सांसद लुंबाराम चौधरी को भी पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता मिली है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना के नियमों के अनुसार पात्र लाभार्थियों को सहायता दी जाती है.
यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि भागीरथ चौधरी स्वयं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं और जिस योजना के तहत उन्हें सब्सिडी मिली, उसका संचालन भी इसी मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड करता है. ऐसे में हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठे. विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने पूरी सब्सिडी वापस कर दी.
भागीरथ चौधरी द्वारा 99 लाख रुपये की सब्सिडी लौटाने के बाद यह मामला नया मोड़ ले चुका है. सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि सब्सिडी की राशि संबंधित बैंक के माध्यम से राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड को वापस की जा रही है. अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए क्या नई व्यवस्था की जाएगी.
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