
महाराष्ट्र के अकोला जिले की बार्शीटाकली तहसील में किसानों ने पोला के मौके पर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. किसान बैलों की जोड़ियों और सूखी सोयाबीन की फसल के साथ तहसील कार्यालय पहुंचे और इलाके को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की. किसानों ने इस प्रदर्शन को ‘काला पोला’ नाम दिया. ‘शेतकरी एल्गार समिति’ के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. किसानों ने तहसील कार्यालय परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं. प्रदर्शन के दौरान किसानों के हाथों में सूखी सोयाबीन की फसल भी दिखाई दी.
किसानों का कहना है कि बारिश में लंबे अंतराल की वजह से खरीफ फसलों की स्थिति लगातार खराब हो रही है. खास तौर पर सोयाबीन की फसल पर इसका असर दिखाई दे रहा है. खेतों में नमी की कमी के चलते फसल सूखने लगी है और किसानों को उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सता रही है.
किसानों ने सरकार से बार्शीटाकली तहसील में फसल की मौजूदा स्थिति का तत्काल पंचनामा कराने की मांग की है. उनका कहना है कि बारिश की कमी से हुए नुकसान का जमीनी स्तर पर आकलन किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके.
प्रदर्शनकारी किसानों ने बार्शीटाकली के साथ पूरे अकोला जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि सिर्फ सूखा घोषित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि फसल नुकसान के आधार पर तत्काल आर्थिक मदद भी दी जानी चाहिए.
पोला किसान और उसके पशुधन के रिश्ते से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है. इस दिन किसान अपने बैलों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं और खेती में उनके योगदान के प्रति आभार जताते हैं. लेकिन बार्शीटाकली में किसानों ने इसी दिन सूखी फसल और बैलों के साथ तहसील कार्यालय पहुंचकर खेती की मौजूदा स्थिति की ओर सरकार का ध्यान खींचा.
किसानों का कहना है कि अगर खेतों में पानी और फसल नहीं होगी, तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब होगी. प्रदर्शन के जरिए उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है. अब किसानों को इंतजार है कि सरकार फसल नुकसान के सर्वे, राहत और सूखा घोषित करने की उनकी मांग पर क्या फैसला लेती है.