
पंजाब में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) से जुड़े अलग-अलग किसान संगठनों का सात दिनों से जारी आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है. चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पिछले मंगलवार से धरना दे रहे किसान नेताओं ने पंजाब सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर सहमति मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया.
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने उनकी कई अहम मांगों को स्वीकार कर लिया है. इनमें पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना, नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर प्रस्ताव लाना, किसानों के कर्ज के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था करना और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का निपटारा शामिल है. 'दि ट्रिब्यून' ने जानकारी दी.
किसानों की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की थी. सरकार ने आश्वासन दिया है कि एक महीने के भीतर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा.
इस सत्र में पंजाब के नदी जल अधिकारों और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. सरकार ने यह भी सहमति जताई है कि मौजूदा जल समझौतों पर फिर से विचार की मांग की जाएगी और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (Punjab Reorganisation Act) में नदी जल बंटवारे से संबंधित प्रावधानों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जाएगा.
किसान संगठनों की मांग थी कि केंद्र सरकार के डैम सेफ्टी एक्ट और सीड बिल 2025 का भी विधानसभा में विरोध किया जाए.
सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि विशेष सत्र में इन दोनों मुद्दों पर भी प्रस्ताव लाए जाएंगे. किसान संगठनों का मानना है कि ये कानून राज्यों और किसानों के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इनके खिलाफ विधानसभा में स्पष्ट रुख अपनाया जाना जरूरी है.
हालांकि किसान नेताओं और पंजाब सरकार के बीच सहमति का प्रारंभिक मसौदा एक दिन पहले ही तैयार हो गया था, लेकिन किसान संगठन लिखित आश्वासन मिलने का इंतजार कर रहे थे.
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के साथ हुई बैठक में एसकेएम के प्रमुख नेताओं बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल, हरिंदर सिंह लखोवाल, प्रेम सिंह भंगू और रामिंदर पटियाला सहित कई प्रतिनिधि शामिल हुए थे. लिखित भरोसा मिलने के बाद किसान नेताओं ने जगतपुरा गांव के पास चल रहे धरने को समाप्त करने का फैसला किया.
सरकार ने किसानों के कर्ज के मुद्दे पर भी बड़ा कदम उठाने का आश्वासन दिया है. इसके तहत वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना का ढांचा तैयार करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी.
इस समिति में सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया जाएगा. समिति किसानों के बकाया कर्जों के निपटारे का व्यावहारिक मॉडल तैयार करेगी. साथ ही विधानसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाले राजनीतिक दलों से भी सुझाव लिए जाएंगे.
किसान संगठनों का मानना है कि इससे कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है.
बैठक में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. सरकार ने भरोसा दिलाया कि निजी चीनी मिलों पर किसानों का जो भुगतान बकाया है, उसे तय समय सीमा के भीतर दिलाया जाएगा.
इसके अलावा सहकारी चीनी मिलों में भुगतान प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए "वन विंडो, वन पेमेंट" व्यवस्था लागू की जाएगी. इससे किसानों को अलग-अलग स्तर पर भुगतान के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और भुगतान समय पर मिल सकेगा.
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आंदोलन समाप्त किया जा रहा है, लेकिन सरकार के आश्वासनों को लागू करने पर लगातार नजर रखी जाएगी. यदि तय समय में फैसलों पर अमल नहीं हुआ तो भविष्य में फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है.
फिलहाल पंजाब सरकार और किसान संगठनों के बीच बनी इस सहमति को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कृषि घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल तत्काल टकराव टला है बल्कि नदी जल, किसानों के कर्ज और गन्ना भुगतान जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर भी आगे बढ़ने का रास्ता खुला है.