महाराष्‍ट्र में सड़कों पर उतरेंगे किसान और मजदूर, 25 जनवरी को मुंबई कूच का ऐलान

महाराष्‍ट्र में सड़कों पर उतरेंगे किसान और मजदूर, 25 जनवरी को मुंबई कूच का ऐलान

महाराष्ट्र में किसानों और मजदूरों की लंबित मांगों को लेकर सियासत गरमा गई है. सीपीआईएम ने ठाणे-पालघर और नासिक के आंदोलनों के बाद अब नासिक से मुंबई तक बड़े लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है.

Farmers Protest maharashtraFarmers Protest maharashtra
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 23, 2026,
  • Updated Jan 23, 2026, 4:10 PM IST

महाराष्ट्र में किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच टकराव और तेज होने जा रहा है. ठाणे-पालघर जिले में सफल लॉन्ग मार्च और नासिक जिले में लगातार जारी सड़क जाम आंदोलनों के बाद अब कम्‍यूनिस्‍ट पॉटी ऑफ इं‍डिया-CPI(M) ने संघर्ष को अगले चरण में ले जाने का फैसला किया है. पार्टी की राज्य कमेटी ने 25 जनवरी 2026 को नासिक से मुंबई तक एक बड़े लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है. CPI(M) मार्च के जरिए राज्य सरकार पर लंबित राज्यस्तरीय मांगों को लेकर दबाव बनाएगी.

स्टेट कमेटी की बैठक में फैसला

CPI(M) ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि 22 जनवरी को हुई राज्य कमेटी की बैठक में हालिया आंदोलनों की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में यह बात सामने आई कि ठाणे और पालघर जिले में हुए लॉन्ग मार्च और घेराव के बाद स्थानीय स्तर की कई मांगें मानी गईं, लेकिन जिन मुद्दों का असर पूरे राज्य के मजदूरों और किसानों पर पड़ता है, वे अब भी अधूरे हैं. इसी के चलते पार्टी ने आंदोलन को मुंबई तक ले जाने का निर्णय लिया है.

नासिक में पांच दिन से आंदोलन जारी

बयान में कहा गया कि नासिक जिले के विभिन्न तालुकों में फॉरेस्ट राइट्स एक्ट को लागू करने, समुद्र में बह रहे पानी को रोककर सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाने और अन्य मांगों को लेकर बीते पांच दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन चल रहा है. आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन स्तर पर बातचीत के बावजूद राज्य सरकार इन मसलों पर ठोस कदम उठाने से बच रही है. 

रेलवे रूट और विकास परियोजनाओं पर टकराव

वहीं, नासिक-पुणे हाई-स्पीड रेलवे रूट को लेकर भी विरोध तेज है. नासिक, अहिल्यानगर और पुणे जिलों में किसानों और स्थानीय संगठनों का कहना है कि मौजूदा प्रस्तावित रूट से बड़े पैमाने पर कृषि भूमि प्रभावित होगी. कई दलों और संगठनों के संयुक्त आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है.

कर्जमाफी पर किसानों की चिंता

इसके अलावा किसान कर्ज माफी का मुद्दा भी इस आंदोलन का अहम केंद्र बना हुआ है. विदर्भ में हुए संयुक्त किसान आंदोलनों के दौरान सरकार ने 30 जून 2026 तक कर्ज माफ करने का वादा किया था. लेकिन, हाल में सरकार द्वारा केवल 2025 तक के बकाया कर्ज की जानकारी मांगे जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है. 2025 के बाद भारी बारिश से बेघर हुए किसानों को आशंका है कि उन्हें कर्ज माफी से बाहर कर दिया जाएगा. 

गन्ना किसानों और मजदूरों की अधूरी मांगें

CPIM ने कहा कि गन्ने के पहले उठान और समय पर भुगतान को लेकर हुए किसान सभा के आंदोलन से कुछ फैक्ट्रियों में हालात सुधरे हैं, लेकिन राज्य स्तर पर नीति और निगरानी से जुड़ी मांगें अब भी लंबित हैं. इसके साथ ही वधान और मुरबे पोर्ट परियोजनाओं को रद्द करने, शक्तिपीठ हाईवे योजना वापस लेने, मजदूरों को जमीन और आवास अधिकार देने, स्मार्ट मीटर योजना खत्म करने और चार लेबर कोड रद्द करने जैसी मांगें भी आंदोलन के एजेंडे में शामिल हैं.

25 जनवरी को मुंबई की ओर कूच

पार्टी ने साफ किया है कि 25 जनवरी को सुबह 9 बजे नासिक से शुरू होने वाला यह लॉन्ग मार्च केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे महाराष्‍ट्र के मजदूरों और किसानों की आवाज है. CPI(M) नेतृत्व ने कहा कि जब तक सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

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