
एक बार फिर नासिक से मुंबई तक एक बड़ा लॉन्ग मार्च निकला है. इस बार करीब 30 हजार लोग महिनेभर का राशन लेकर निकले हैं. यह मार्च 2 से 3 फरवरी के बीच मुंबई पहुंचेगा. लोग इस मार्च में अपनी मांगों को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) ने कहा है कि पहले भी नासिक ज़िले में कई बार रोड ब्लॉक और लॉन्ग मार्च हुए, लेकिन सरकार ने माने हुए वादों को पूरा नहीं किया. कॉमरेड जेपी गावित ने कहा कि इस बार आदिवासी पूरी तरह से अपनी मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रखेंगे. अगर सरकार नहीं मानेगी तो विधानसभा घेराव भी किया जाएगा.
किसान सभा के नेता अजित नवले ने कहा कि सरकार अक्सर मांगें तो मान लेती है, लेकिन उन्हें लागू नहीं करती. CPI(M) और किसान सभा आदिवासियों की जमीन की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा और RSS का विकास बड़े उद्योगपतियों के लिए होता है, जबकि किसानों की जमीन उनके नाम पर नहीं दी जा रही. किसान कर्ज माफी और रोजगार की मांग कर रहे हैं.
ठाणे और पालघर जिलों में पहले भी लॉन्ग मार्च और प्रदर्शन हुए. वहां कुछ स्थानीय मांगें मान ली गई हैं. लेकिन राज्य स्तर की मांगें अभी भी पेंडिंग हैं. पिछले पांच दिनों से नासिक के अलग-अलग गांवों में लोग जंगल की जमीन, समुद्र का पानी और मजदूरों के अधिकार के लिए दिन-रात आंदोलन कर रहे हैं.
नासिक से मुंबई जाने वाले इस लॉन्ग मार्च ने पूरे शहर का ट्रैफिक ठप्प कर दिया. ठाणे के भिवंडी शहर में पालघर और अन्य जिलों के लोग भी शामिल होंगे. इस वजह से मुंबई और आसपास के इलाके में भारी ट्रैफिक जाम हो सकता है.
लोगों की मुख्य मांगें बहुत साफ हैं. वे चाहते हैं कि वडावन और मुरबे पोर्ट और शक्तिपीठ हाईवे जैसी योजनाएं कैंसिल की जाएं. इसके अलावा जंगल की जमीन, मंदिर की जमीन, मजदूरों के घर और उनका ग्राउंड फ्लोर उनकी मदद के लिए सुरक्षित किया जाए. लोग यह भी चाहते हैं कि एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट में बदलाव करके मजदूरों के रोजगार के अधिकार को खत्म न किया जाए. साथ ही स्मार्ट मीटर स्कीम को भी रद्द किया जाए, जिससे बिजली का बिल बहुत ज्यादा बढ़ता है. (प्रवीण बी ठाकरे का इनपुट)
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