
कंटोला (ककोड़ा) सब्जी जंगली नाम से जाने जाती है. यह सब्जी ज्यादातर पहाड़ों पर होती है, लेकिन अब किसान ककोड़ा की खेती कर रहे हैं. ककोड़ा की खेती में आने से किसानों को लाखों रुपए की आमदनी हो रही है. तेलंगाना, हैदराबाद, विदर्भ से भारी मांग के कारण यह जंगली सब्जी कंटोला (ककोड़ा) 15,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. हल्दा के एक किसान आनंद बोइनवाड द्वारा की गई कंटोला की खेती लाभदायक साबित हो रही है.
दरअसल, भोकर तहसील स्थित हलदा गांव के एक किसान आनंद बोइनवाड ने पिछले साल से अपने तीन एकड़ खेत में कंटोला की खेती शुरू की है. कंटोला वास्तव में एक जंगली सब्जी है, यह कई बीमारियों को नियंत्रित करने में भी उपयोगी है.
सोनारी के रहने वाले प्रगतिशील किसान गंगाधर हनमांगे के मार्गदर्शन में इस जंगली सब्जी को बोइनवाड ने खेत में लगाया है. कंटोला की पैदावार जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होती है. महाराष्ट्र से भी ज्यादा कंटोला को तेलंगाना, हैदराबाद में 150 से 200 रुपये से व्यापारी खरीद के ले जाते हैं, क्योंकि तेलंगाना में इस जंगली सब्जी की भारी मांग है.
कंटोला का नांदेड़ के बाज़ार में भी भारी मांग है. बाजार में प्रति किलो 200 से 300 सौ रुपये किलो बिक रही है. हालांकि, इस सब्जी की पैदावार तीन एकड़ में 60 से 70 क्विंटल होती है. 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल है और यह सिर्फ तीन महीने की फसल है.
खास बात यह है कि एक बार कंटोला लगाने के बाद दोबारा पौधे लगाने के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ता है. इस फसल से कम लागत में ज्यादा आमदनी मिल रही है. बोइनवाड को तीन एकड़ में तीन माह में 65 से 70 क्विंटल कंटोला की आमदनी होने पर किसान को 9 लाख लाख रुपये मिलते हैं.
ककोड़ा की सब्जी में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं. ककोड़ा आमतौर पर मॉनसून के मौसम में बाजार में आता है. ककोड़ा खाने से सिरदर्द, बाल, झड़ना, कान दर्द, खांसी, पेट में इंफेक्शन की समस्या नहीं होती है. इसे खाने से डायबिटीज में भी बहुत फायदा होता है. इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है.