PHOTOS: युवा किसान का देसी जुगाड़ बना मिसाल, पावर टिलर से की फसलों की निराई-गुड़ाई

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PHOTOS: युवा किसान का देसी जुगाड़ बना मिसाल, पावर टिलर से की फसलों की निराई-गुड़ाई

निराई-गुड़ाई नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित
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खेती में लगातार बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और खेती-किसानी में बैलों कम इस्तेमाल आज किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन गई है. खासकर खरीफ सीजन में समय पर निराई-गुड़ाई नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है.

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ऐसे समय में महाराष्ट्र के जालना जिले के एक युवा किसान ने अपने अनोखे जुगाड़ से खेती को आसान और किफायती बनाने का तरीका खोज निकाला है. उनका यह प्रयोग अब आसपास के किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, जालना जिले की भोकरदन तहसील के गणेशनगर खड़की गांव के युवा किसान समाधान वानखेड़े ने पावर टिलर की मदद से सोयाबीन, उड़द और मूंग जैसी खरीफ फसलों की निराई-गुड़ाई के लिए एक खास जुगाड़ तैयार किया है.

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उन्होंने पावर टिलर में गुड़ाई का उपकरण जोड़कर ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे खेत में निराई-गुड़ाई का काम तेजी से और कम खर्च में पूरा किया जा सकता है. समाधान वानखेड़े ने बताया कि पहले गुड़ाई के लिए बैलों या मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ता था.

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लेकिन खेती के सीजन में समय पर मजदूर मिलना मुश्किल हो जाता है और मजदूरी की लागत भी लगातार बढ़ रही है. वहीं, गांवों में बैलों की संख्या भी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है. इन समस्याओं को देखते हुए उन्होंने पावर टिलर में कुछ बदलाव कर उसे गुड़ाई के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया.

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इस जुगाड़ की मदद से सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसलों के बीच आसानी से अंतर-निराई की जा रही है. इससे खेत में खरपतवार नियंत्रण बेहतर हो रहा है, फसलों की जड़ों तक हवा और नमी पहुंच रही है और पौधों की बढ़वार भी अच्छी हो रही है.

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सबसे बड़ी बात यह है कि कम समय में अधिक क्षेत्र की गुड़ाई हो जाती है, जिससे किसानों का समय, मेहनत और लागत तीनों की बचत होती है.  इस नवाचार को सफल बनाने में अंकुश वानखेड़े और आकाश वानखेड़े ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया. तीनों युवाओं ने मिलकर इस जुगाड़ को तैयार किया, जो अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है.

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कई किसान इस तकनीक को देखने और समझने उनके खेत तक पहुंच रहे हैं. कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि किसान स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करते हुए ऐसे कम लागत वाले नवाचार अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)