PHOTOS: मुफ्त सोयाबीन बीज बने मुसीबत, फसल अंकुरित नहीं होने से किसानों को लाखों का नुकसान

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PHOTOS: मुफ्त सोयाबीन बीज बने मुसीबत, फसल अंकुरित नहीं होने से किसानों को लाखों का नुकसान

मुफ्त सोयाबीन बीज बना मुसीबत
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महाराष्ट्र के जालना जिले से किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. दरअसल, यहां कृषि विभाग की ओर से महिला बचत समूहों के माध्यम से किसानों को मुफ्त में बांटे गए महाबीज कंपनी के सोयाबीन बीज अंकुरित नहीं होने का मामला सामने आया है.

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बीज नहीं उगने से किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार, जालना तहसील के रेवगांव गांव के 15 किसानों ने करीब 10 हेक्टेयर यानी लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में इन बीजों की बुवाई की थी.

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किसानों का कहना है कि बुवाई किए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन खेतों में बीजों का अंकुरण नहीं हुआ. इससे पूरी फसल प्रभावित हो गई है और अब किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है. पीड़ित किसानों के अनुसार, खेत की जुताई, बुवाई, खाद, खरपतवारनाशक और अन्य कृषि कार्यों पर करीब 1 लाख 5 हजार रुपये खर्च किए गए थे.

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लेकिन बीज अंकुरित नहीं होने के कारण यह पूरा खर्च बेकार हो गया. अब दोबारा बीज खरीदने, खेत तैयार करने और बुवाई करने के लिए फिर से पैसा खर्च करना पड़ेगा, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है. इस मामले को लेकर किसानों ने जिला कलेक्टर और कृषि विभाग को लिखित शिकायत सौंपी है.

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किसानों ने मांग की है कि प्रभावित खेतों का जल्द से जल्द पंचनामा कराया जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे दोबारा खेती कर सकें. वहीं, कृषि विभाग का कहना है कि रेवगांव गांव से महाबीज कंपनी के बीजों के अंकुरित नहीं होने की अब तक करीब 40 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

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कृषि विभाग ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद विभाग की टीम ने प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया है और बीजों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीजों के अंकुरित नहीं होने की असली वजह क्या है.

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सरकारी मदद ही बनी परेशानीकिसानों का कहना है कि सरकार ने खेती में सहायता के उद्देश्य से मुफ्त सोयाबीन बीज उपलब्ध कराए थे, ताकि किसानों का खर्च कम हो सके. लेकिन यदि वही बीज अंकुरित नहीं होंगे, तो किसानों को राहत मिलने के बजाय दोहरा नुकसान उठाना पड़ेगा. किसानों ने सरकार से मांग की है कि जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)