PHOTOS: मॉनसून में पौधे हो रहे हैं खराब? ये आसान उपाय बचाएंगे आपका गार्डन

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PHOTOS: मॉनसून में पौधे हो रहे हैं खराब? ये आसान उपाय बचाएंगे आपका गार्डन

मुरझाए पौधे भी हो जाएंगे हरे-भरे
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बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन कई बार ज्यादा बारिश, जलभराव या पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधे मुरझाने लगते हैं. ऐसे में कुछ आसान घरेलू और जैविक उपाय अपनाकर पौधों को फिर से स्वस्थ बनाया जा सकता है.

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बरसात में पौधों के मुरझाने की सबसे बड़ी वजह गमले में पानी का जमा होना है. लगातार गीली मिट्टी से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और वे सड़ने लगती हैं. इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी, फफूंद और खराब जल निकासी भी पौधों को कमजोर बना देती है.

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बरसात के मौसम में अलग से रोजाना सिंचाई करने की जरूरत नहीं होती. जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी लगे, तभी पानी दें. गमले के नीचे पानी निकलने का रास्ता जरूर होना चाहिए, ताकि जड़ों में सड़न न हो.

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बरसात के मौसम में पौधों को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की हल्की धूप और अच्छी हवा मिल सके. इससे फफूंद का खतरा कम होता है और पौधे तेजी से स्वस्थ होते हैं. ऐसे में कोशिश करें की बरसात में पौधों को कम से 6 घंटे का धूप मिले.

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मुरझाई हुई पत्तियों, सूखे फूलों और खराब टहनियों को समय-समय पर काटते रहें. इससे पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और पत्तियों के विकास में लगती है और पौधा जल्दी रिकवर करता है.

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बरसात में फफूंद तेजी से फैलती है. अगर पत्तियों पर सफेद, काले या भूरे धब्बे दिखाई दें तो प्रभावित हिस्से को हटा दें. वहीं, जरूरत पड़ने पर जैविक फफूंदनाशी या नीम के तेल का घोल छिड़क सकते हैं.

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अगर आप वर्मी कम्पोस्ट, सड़ी हुई गोबर की खाद या नीम खली का सही मात्रा में इस्तेमाल करें, जलभराव से बचाएं और समय-समय पर पौधों की देखभाल करें, तो बरसात में भी मुरझाए पौधे फिर से हरे-भरे हो जाएंगे और नए पत्ते, फूल और फल देने लगेंगे.